रैली तक सिमटकर रह गया स्काउट-गाइड का अस्तित्व

धन भी है और संसाधन भी इसके बावजूद शिविरों का आयोजन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है

less than 1 minute read
Jan 03, 2016
Feature image
आजमगढ़. स्काउट-गाइड युवाओं के आत्मबल को ऊंचा रखते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है लेकिन जनपद में स्काउट-गाइड का अस्तित्व मात्र रैलियों तक सिमटकर रह गया है। ऐसा भी नहीं है इस पर खर्च करने के लिए धन की कमी है। धन भी है और संसाधन भी इसके बावजूद शिविरों का आयोजन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्काउट-गाइडों की संख्या भी हालात से पर्दा उठाने के लिए काफी है।
जनपद में वैसे तो पौने पांच इण्टर कालेज और करीब 90 डिग्री कालेज हैं। स्काउट गाइड मात्र पांच दर्जन विद्यालयों में हैं। सम्बन्धित लोग भी नहीं जानते कि इसमें कितने स्काउट और कितने गाइड हैं। प्रतिवर्ष मण्डल स्तरीय व जनपद स्तरीय रैली का आयोजन होता है। मण्डल के तीनों जिले आजमगढ़, मऊ व बलिया कहीं भी रैली हो यहां के स्काउट गाइड भाग लेते हैं। वर्ष 2010 में शिक्षक सदन ब्रम्हस्थान में प्राथमिक व माध्यमिक के शिक्षकों को इसका प्रशिक्षण दिया गया। हाल में भी कुछ लोग प्रशिक्षित किये गये। लेकिन परिणाम बद से बदतर है। अब इसे जागरूकता का अभाव कहें या सम्बन्धित अधिकारियों की उपेक्षा लेकिन जिले के युवाओं की रुचि इसमें नहीं है। स्काउट कमिश्नर बताते हैं कि समय-समय पर शिविर का आयोजन किया जा रहा है। किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है। खाते में पर्याप्त धन है। गरीब छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए योजना चलायी जा रही है। यदि वह शिविर में भाग लेते हैं तो ड्रेस व अन्य सुविधाएं संस्था द्वारा उपलब्ध करायी जाती है।

Published on:
03 Jan 2016 12:30 pm