आखिर पांच रुपए की कहां से होगी व्यवस्थागलफांस न बन जाए स्कूलों में दूध वितरण
फागी. सरकारी स्कूलों के अध्यापक प्रदेश सरकार की योजना के तहत अन्नपूर्णा योजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण पोषण दिलाने के लिए 2 जुलाई से छात्रों को दूध पिलाने की तैयारी की जा रही है। लेकिन योजना के निर्देश स्पष्ट नहीं होने से शिक्षकों को योजना शुरू होने से पूर्व की चिन्ता सताने लगी है। सरकार ने दूध की दर 35 रुपए तय की है, जबकि डेयरी सहित खुले में भी दूध ४० रुपए प्रति लीटर से कम नहीं है। ऐसे में प्रति लीटर पांच रुपए गुरुजी की जेब से जाने तय हैं।
जानकारी अनुसार राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय की कक्षा एक से आठ तक के बालकों को सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को कक्षा एक से पांच तक के छात्रों को 150 मि.ली. तथा कक्षा 6 से आठ तक के छात्रों को 200 मि.ली. दूध दिया जाना तय किया है। इन छात्रों को दूध पिलाने के लिए विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में 35 रुपए प्रति लीटर तथा शहरी सरकारी स्कूलों में 40 रुपए प्रतिलीटर की दर से राशि आवंटित की गई है। शिक्षकों ने बताया कि सरस डेयरी के अलावा खुले में भी 40 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध नहीं मिलता है। ऐसे हालातों में शिक्षकों के सामने दूध खरीदना टेढ़ी खीर नजर आ रही है।
विस्तार में लगेगा समय
विद्यालयों में दूध गर्म करने, बर्तन खरीदन, गैस कनेक्शन लेने व सिलेण्डर भरवाने की राशी आवंटित की गई। लेकिन दो जुलाई तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होने की बात करना बेमानी होगा। वहीं योजना के क्रियान्वयन में शिक्षकों को खासी मशक्कत करनी पड़ेेगी। वहीं इसका वितरण करने एवं प्रतिदिन दूध वितरण के हिसाब करने में एक शिक्षक उलझा रहेगा। जिससे शैक्षिक कार्यों पर विपरीत असर पड़ेगा। वहीं शिक्षकों का कहना है कि मामले को लेकर शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों या विभाग के मुखिया ने हस्तक्षेप नहीं किया तो योजना की सफलता पर संशय के बादल मंडरा गए हैं;