
जयपुर. जिले के फागी कस्बे में साढे आठ साल पहले छह वर्षीय मासूम बालिका के साथ बलात्कार के बाद उसकी बेरहमी से हत्या के आरोपी महेन्द्र उर्फ धर्मेन्द्र बैरवा को फांसी सुनाते समय महिला जज शिल्पा समीर ने कविता की कुछ ऐसी पंक्तिया फैसले में लिखी जिसे पढ़कर हर कोई भावुक हो जाए। फैसला सुनाते समय कोर्ट में मौजूद हर कोई मासूम की हत्या व बलात्कार की घटना को सोचकर भावुक हो गया। लेकिन फैसले के बाद दरिंदे के शिकन तक नहीं थी। मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया फिर भी मासूम के गुनहगार को पश्चताप भी नहीं था। वह फैसला सुनकर दंग जरूर रह गया। फैसले के बाद चालानी गार्ड उसे जेल ले गए।
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मैं नन्हीं सी गुडिया थी, मुझे जीना था
हंसना था, खेलना था
फिर क्यों इतना दर्द दिया
बिना कसूर, बिना गलती के,
क्यों निष्ठुरता से तोडकर
मुझकों फेक दिया।
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फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि छह वर्षीय असहाय बच्ची थी जिसके द्वारा प्रतिरोध नहीं किया जा सकता था। अभियुक्त ने छोटी बच्ची का बलात्कार कर बेरहमी से गला घोंटकर उसकी हत्या की। यह अपराध केवल नृशंस ही नहीं है बल्कि सम्पूर्ण समाज को प्रभावित करने वाला है। यह घटना ऐसी घटना है जिसको सोच अहसास नि:शब्द हो जाते हैं। भावनाएं खामोश हो जाती हैं। मृतका की पीड़ा की अभिव्यक्ति को लफ्ज नहीं मिलते हैं।
मृतका व उसके सम्मान को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन उसके सम्मान को कायम रखने के लिए बर्बरता से किए गए अपराध करने वाले अपराधी को सख्त सजा से दण्डित किया जाने का दायित्व न्यायालय का है। जिससे अपराधियों में भय व्याप्त हो सके। अभियुक्त को मृत्युदंड के अलावा कोई ओर दंड दिया ही नहीं जा सकता।
पहले बलात्कार फिर सूंतली से गला घोटकर की हत्या
गौरतलब है कि 21 मई 2011 को आरोपी महेन्द्र फागी निवासी परिचित के घर आया था। जहां उसकी 6 वर्षीय पुत्री अकेली थी। इसका फायदा उठाकर वह उसके कच्चे मकान में बने एक कमरे में ले गया, जहां उसके साथ बलात्कार किया फिर सूंतली (रस्सी) से गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। शव को बक्से के पीछे छिपाकर एवं घर में बंधा बकरा लेकर फरार हो गया। परिजनों ने बच्ची को तलाश तो शव लहूलुहान हालत में मिला। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया।