किसी भी गांव को तब तलक खुले में शौच प्रथा (ODF) मुक्त गांव नहीं माना जाएगा। जब तक गांव का हर एक एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग न करने लगे।
बहराइच. किसी भी गांव को तब तलक खुले में शौच प्रथा (ODF) मुक्त गांव नहीं माना जाएगा। जब तक गांव का हर एक एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग न करने लगे। गांव का कोई भी बच्चा अगर शौचालय के बजाए खुले में शौंच करता पाया गया तो उस गांव को किसी कीमत पर खुले में शौच से मुक्त (ODF) गांव नहीं माना जाएगा। गांव में शत प्रतिशत शौचालय का प्रयोग करने वाले लोगों के गांव को ही ODF ग्राम पंचायत की संज्ञा से नवाजा जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था यह ऐलान
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से इस बात का ऐलान किया था कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आगामी 2019 तक पूरे भारत को स्वच्छ भारत मिशन अभियान का अभियान चलाकर खुले में शौंच प्रथा से देश को मुक्त कराने का संकल्प लिया था। इसी कड़ी में देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में स्थित 14 विकासखंडों के 1386 ग्राम पंचायतों को 2 अक्टूबर 2018 तक ODF कराने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिनमें जिला प्रसासन के सहयोग से अब तलक 563 गांव को ODF गांव घोषित किया जा चुका है। जबकि 823 शेष गांव को आगामी 2 अक्टूबर तक हर हाल में ODF गांव कराने के लिए व्यापक स्तर पर सभी विभागों के अफसरों को नामित कर मिशन को साकार करने का अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है।
5,11,554 शौचालयों का मिला लक्ष्य
बहराइच जिले की बात करें तो 8 लाख परिवारों के लिए 5 लाख 11 हजार 554 शौचालयों का लक्ष्य मिला है जिसमें 4 लाख 44 हजार 790 शौचालय का निर्माण कराकर 86.95 प्रतिशत शौचालयों से जनपद को आच्छादित कर दिया गया है। अवशेष 66764 परिवारों को बेसलाइन सर्वे वर्ष 2012 के डाटा के अनुसार आगामी 2 अक्टूबर तक आच्छदित करने का काम बड़ी तेजी से जारी है। देवीपाटन मंडल में आने वाले 4 जनपदों गोंडा ,बलरामपुर,श्रावस्ती और बहराइच हैं। जिनमें गोंडा जिले के 1816 राजस्व गांव में से 356 राजस्व गांव को जिला प्रसासन की ओर से ODF घोषित किया जा चुका है। वहीं बलरामपुर के 996 राजस्व गांव में से 423 गांव ODF हो चुके हैं। इसी कड़ी में श्रावस्ती जनपद के 525 राजस्व गांव में से 230 गांव पूरी तरह ODF का तमगा हासिल कर चुके हैं।
दो अक्टूबर 2018 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया
खुले में शौच की प्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो अक्टूबर 2018 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए पंचायतीराज विभाग, मनरेगा, श्रम विभागों के समन्वय प्रयास से शौचालय निर्माण का वृहद अभियान जिले में युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों को चयन करके शत-प्रतिशत परिवारों को शौचालय की सुविधा से आच्छादित किया जा रहा है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को विभागों द्वारा शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि के तौर पर 12 हजार रूपए की आर्थिक धनराशि मुहैया कराए जाने का प्राविधान है।
खुले में शौंच प्रथा को त्यागने के लिए किया जा रहा प्रेरित
वहीं इस प्रकरण पर स्वच्छ भारत मिशन अभियान के जिला समन्यवक अभिषेक सिंह ने बताया कि जिले के 14 विकास खण्डों में 14 जिला स्तरीय नोडल अफसरों के साथ ही स्वच्छाग्राहियों और निगरानी कमेटी के माध्यम से लोगों को खुले में शौंच प्रथा को त्यागने के लिए प्रेरित करने का काम किया जा रहा है। अब देखना है कि आगामी 2018 तक मोदी मिशन का सपना किस स्तर तक कामयाब होता है।