बारिश होने पर छत से टपकता पानी। जगह-जगह पानी को एकत्रित करने के लिए रखे गए बर्तन। पानी की वजह से दीवारों का नम होना। अस्पताल में उपचार कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को होती परेशानी। कुछ इस तरह का आलम आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र) गुडरु में नजर आता है। बालाघाट. बारिश होने […]
बारिश होने पर छत से टपकता पानी। जगह-जगह पानी को एकत्रित करने के लिए रखे गए बर्तन। पानी की वजह से दीवारों का नम होना। अस्पताल में उपचार कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को होती परेशानी। कुछ इस तरह का आलम आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र) गुडरु में नजर आता है।
बालाघाट. बारिश होने पर छत से टपकता पानी। जगह-जगह पानी को एकत्रित करने के लिए रखे गए बर्तन। पानी की वजह से दीवारों का नम होना। अस्पताल में उपचार कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों को होती परेशानी। कुछ इस तरह का आलम आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र) गुडरु में नजर आता है।
जानकारी के अनुसार उपस्वास्थ्य केंद्र गुडरु का भवन जर्जर हो चुका है। जबकि शासन ने उप स्वास्थ्य केंद्र गुडरु को आयुष्मान आरोग्य केंद्र में उन्नत किया है। यहां नया भवन भी बनाया गया है। भवन बने अभी कुछ वर्ष ही हुए हैं। इस भवन से अब पानी रिसना प्रारंभ हो गया है। जिसके कारण इमारत जर्जर होने लगी है। सबसे ज्यादा परेशानी यहां कार्य करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को होती है। उल्लेखनीय है कि अस्पताल में पदस्थ कर्मचारियों ने इस समस्या के निराकरण के लिए विभाग को पत्र भी लिखा है। लेकिन अभी तक इस समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है। जिसके चलते समस्या जस की तस बनी हुई है।
12 हजार से अधिक की आबादी है निर्भर
इस उपस्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत तीन ग्राम पंचायतों के एक दर्जन से अधिक गांव आते हैं। इन गांवों की 12 हजार से अधिक की आबादी निर्भर है। इन गांवों के ग्रामीण स्वास्थ्य खराब होने पर उपचार कराने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कतें बारिश के दिनों में होती है। दरअसल, बारिश के दिनों में अस्पताल के दीवारों, छतों से पानी टपकते रहता है। जिसके कारण मरीज और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को परेशानी होती है।
बर्तनों में इकठ्ठा करते हैं पानी
अस्पताल में पदस्थ कर्मचारी बारिश होने पर पानी को इकठ्ठा करने के लिए भवन के अंदर बर्तन रखते हैं। ताकि पानी पूरी तरह से कमरों में न फैल पाएं। हालांकि, दीवारों और छतों से टपकने वाला पानी पूरी तरह से बर्तन में इकठ्ठा नहीं हो पाता है। जिसके कारण कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बायो वेस्ट का नहीं हो पा रहा निष्पादन
अस्पताल से निकलने वाले बायो वेस्ट का भी निष्पादन नहीं हो पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने बायो वेस्ट के निष्पादन के लिए पंचायत और विभागीय अधिकारियों को भी पत्र लिखा है। लेकिन अभी तक इसका निराकरण नहीं हो पाया है।