बालाघाट

जीवन खुश रहकर जीना है, माइंड रखे रिलेक्स : मुकेश मेश्राम

बालाघाट. यूपीएससी, एमपीपीएससी आदि की भागदौड़ में न रहे। आज के समय में हजारों क्षेत्र हैं, जहां कैरियर बनाया जा सकता है। हमारा मकसद होना चाहिए जीवन खुश रहकर जीना है। इसके लिए माइंड रिलेक्स रखें। इससे फोकस करने की क्षमता, स्मरण शक्ति, काबिलियत व कार्यक्षमता बढ़ती है। सफल होने की संभावना अधिक रहती है। […]

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Feb 06, 2026
अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश का साक्षात्कार

बालाघाट. यूपीएससी, एमपीपीएससी आदि की भागदौड़ में न रहे। आज के समय में हजारों क्षेत्र हैं, जहां कैरियर बनाया जा सकता है। हमारा मकसद होना चाहिए जीवन खुश रहकर जीना है। इसके लिए माइंड रिलेक्स रखें। इससे फोकस करने की क्षमता, स्मरण शक्ति, काबिलियत व कार्यक्षमता बढ़ती है। सफल होने की संभावना अधिक रहती है। यह बात अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश मुकेश मेश्राम ने कही। वे शुक्रवार को बालाघाट में ‘पत्रिका’ से मुखातिब थे।

उन्होंने कहा कि जान हॉपकिंस यूनिविर्सिटी अमेरिका, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड व कैम्ब्रिज सहित देश के अलग-अलग यूनिवर्सिटियों ने इसको लेकर कई रिसर्च व एक्सपेरिमेंट किए हैं। सबने इसे स्वीकारा है।

एक सवाल के जवाब में कहा कि अव्वल आने वाली चीज खत्म कर देनी चाहिए। बच्चों को हमेशा प्रोत्साहित करना चाहिए। उनको क्या बनना है? उनके हिसाब से सोचने दें। उनको मानसिक व मोरल सपोर्ट दें। इसमें मां-बाप के साथ स्कूल व कॉलेज की बड़ी भूमिका रहती है। इन दिनों हर कोई प्रतिस्पर्धा में रहता है। इससे तनाव बढ़ता है। ऐसे में कोई ऐसी जगह होनी चाहिए जहां बच्चे तनाव फ्री रह सकें।

बालाघाट विविधताओं का जिला

मैं बालाघाट का हूं। मुझे यहां की विशिष्टताओं पर गर्व है। यहां जंगल करीब 54 प्रतिशत है। ये माना जाता है कि आदमी के स्वास्थ्य के लिए 30 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर होना चाहिए। उत्तर प्रदेश में यह केवल सात प्रतिशत है।

बालाघाट में 1000 पुरुष पर 1024 महिलाएं हैं। यहां बुंदेली, महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ी संस्कृति मिलती है। सभी मिलकर बालाघाटी संस्कृति बनती है। यहां बहुत सारी बोलियां है। पहनावे अलग-अलग हैं। यह विविधाताओं का जिला है। यहां दहेज प्रथा प्रचलित व स्थापित स्वरूप में नहीं है।

एक सवाल के जवाब में कहा कि यहां की बेटियों ने विदेशों में झंडा गाड़ा है। घरों में चौका-चूल्हा करने वाली मां की बेटी काजल मेश्राम आज आस्ट्रेलिया में वैज्ञानिक है।

(पत्रिका के सवाल, अवर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के जवाब।)

सवाल - बालाघाट की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बेटो से आगे हैं, क्या यह निरंतरता आगे जारी रहेगी? जवाब - बालाघाट की बेटियां विदेशों में स्थापित हो रही है। यहां बढिय़ा प्रगतिशील व विकास वाली सोच है।

इसे समझाने और बताने की जरूरत है। यह निरंतरता आगे भी जारी रहेगी।

सवाल -

बालाघाट की पहचान अति पिछड़ा जनजाति बैगा का अपेक्षाकृत उत्थान नहीं हुआ। इसके लिए क्या करना चाहिए?

जवाब - सरकार के पास पैसे और योजनाओं की कमी नहीं है। गैर जानकारी में वंचित लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। उनके बीच जाकर योजनाओं का फार्म भरवाकर इसका लाभ देने का प्रयास होना चाहिए। मैं साहब हूं। देने वाला हूं। इस मानसिकता को खत्म करने की जरूरत है।

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