सरकारी तालाब से मुरम चोरी कर सडक़ में उपयोग करने का मामला
जिले में अवैध खनन और प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने सुर्खियों में बना हुआ है। मामला लालबर्रा जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत निलजी से जुड़ा है। यहां गांव के सरकारी तालाब से जेसीबी मशीन और दर्जनों ट्रैक्टरों के माध्यम से मुरम का अवैध उत्खनन व परिवहन किए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार निलजी के कट्टी टोला से करीब एक किमी दूर तक सडक़ निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि इस सडक़ निर्माण में जिस मुरम का उपयोग किया जा रहा है, वह उसी सरकारी तालाब से चोरी छिपे निकाली गई है। इस गंभीर मामले को लेकर पूर्व में कलेक्टर, एसडीएम एवं तहसीलदार को शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन लंबे समय तक न तो मौके पर जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली। प्रशासन की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
इस मामले को लेकर जब खनिज निरीक्षक सुरेश कुलस्ते से चर्चा की गई तो निर्माण एजेंसी के पक्ष में दलीले देते नजर आए। खनिज निरीक्षक ने तर्क देते हुए कहा कि यदि ग्राम पंचायत तालाब से उत्खनन कराती है, तो उस पर रॉयल्टी अथवा छूट का प्रावधान है। इतना ही नहीं उन्होंने मध्य प्रदेश शासन का वर्ष 2024 का एक दिशा निर्देश दिखाया। हालाकि पत्र में सरकारी तालाब से मिट्टी के उत्खनन पर छूट का उल्लेख किया गया है, जबकि यहां मामला मुरम खनिज के उत्खनन का है।
पूरे मामले में विचारणीय तथ्य यह है कि जिले में एक भी अधिकृत मुरम खदान नहीं है। इसके बावजूद खुलेआम मुरम का उत्खनन और परिवहन कर लिया गया। जबकि अवैध रूप से निकाली गई मुरम जिस सडक़ के लिए उपयोग की जा रही है, उक्त सडक़ के लिए शासन ने करीब 32 लाख की स्वीकृति मिल चुकी है। हालाकि आरईएस विभाग के अनुसार स्टीमेट के आधार पर 21 लाख में सडक़ निर्माण करवाई जाएगी।
इस मामले में तहसीलदार लालबर्रा भूपेंद्र अहिरवार ने स्पष्ट किया कि प्रकरण की जांच के लिए एक संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। टीम में खनिज निरीक्षक एवं राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल हैं। मौके पर जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब देखना है गठित जांच टीम कब स्थल निरीक्षण कर जांच करती है। जांच में क्या सामने आता है।