बालाघाट

कोषालय ने फिर अटकाया अर्जित अवकाश का भुगतान

संयुक्त विभाग पेंशनर संघ ने जताई आपत्ति, सौंपा ज्ञापन मांग पूरी न होने पर अनशन की दी चेतावनी

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Dec 18, 2024
संयुक्त विभाग पेंशनर संघ ने जताई आपत्ति, सौंपा ज्ञापन

बालाघाट. सेवानिवृत्त शिक्षकों के अर्जित अवकाश नगदीकरण बिलों का भुगतान एक बार फिर से कोषालय द्वारा अटका दिया गया है। वहीं वर्षो पुराने नियम का हवाला देकर नियामानुसार बिल का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जहां 1980 के नियमों का हवाला देते हुए अर्जित अवकाश के नगदी करण बिल अटकाए गए हैं। ऐसा आरोप संयुक्त विभाग पेंशनर संघ ने लगाए हैं। जिन्होंने 1980 में बनाए गए नगदी करण के भुगतान के नियम में तीन बार संशोधन होने की बात कहते हुए अर्जित अवकाश के नगरीकरण बिल का नियमानुसार तीन बार भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने अपनी इस मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने कोषालय अधिकारी पर 44 वर्ष पूर्व नियम की बात कर भुगतान को अटकने का आरोप लगाया है। जिन्होंने पुन: इसी मांग को लेकर मंगलवार को ज्ञापन सौपकर प्रशासन को 15 दोनों का अल्टीमेटम देने की बात कही है। उन्होंने समय सीमा के भीतर इस समस्या का निराकरण न होने पर कलेक्टर कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर आमरण अनशन किया जाने की चेतावनी दी है। मांग को लेकर ज्ञापन सौपने कलेक्ट्रेट पहुंचे पदाधिकारी में संयुक्त विभाग पेंशनर संघ जिला अध्यक्ष बीएल चौधरी, संभागीय अध्यक्ष बीएल राणा, नारायण शक्करपुड़े, नारायण सोलंकी, सीडी पटले और प्रवक्ता सतीश चंद्र दुबे सहित अन्य पदाधिकारी सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने निराकरण के दिए थे निर्देश
पदाधिकारियों ने बताया कि वर्षों से अर्जित अवकाश के नगरीकरण भुगतान की मांग को लेकर आवेदन निवेदन किया जा रहा है। कलेक्टर मृणाल मीणा के बालाघाट आगमन पर संघ द्वारा उनसे मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्या बताई गई थी। जिसको गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बालाघाट द्वारा दो दिवसीय शिविर लगाकर डीईओ को शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण दो दिनों के भीतर किए जाने के निर्देश दिए गए थे। डीईओ कार्यालय से कार्रवाई पूर्ण होने के बाद जब प्रकरण कोषालय पहुंचे तो वहां लगभग 300 प्रकरणों में से कुछ प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया है। वहीं अर्जित अवकाश के निराकरण के कुछ प्रकरण अब भी लंबित पड़े हैं। बताया जा रहा है कि अब ट्रेजरी अधिकारी द्वारा 1980 का नियम बताकर भुगतान अटकाया जा रहा हैं। वही एक बार में नगरीकरण का भुगतान करने की बात कह रहे हैं। जबकि 1980 के नियम में तीन बार संशोधन हो चुका है। वहीं 2007 से पहले के प्रकरणों का भुगतान प्राचार्या की स्वीकृति से 2008 के बाद अर्जित अवकाश का भुगतान कलेक्टर की स्वीकृति से और अर्जित अवकाश की अधिक गणना होने पर आयुक्त की स्वीकृति के तहत तीन अलग-अलग भुगतान निकालने का नियम बनाया गया है। लेकिन ट्रेजरी ऑफिसर नहीं मान रहे हैं, उनका भुगतान अटक गया है।

बिलो का भुगतान नहीं
संयुकत विभाग पेंशनर संघ अध्यक्ष बीएल चौधरी ने बताया कि शिक्षक विभाग के 300 पेंशनर साथियों के अर्जित अवकाश के नगदीकरण में आ रही समस्या को लेकरए संघ ने कलेक्टर का ध्यानाकर्षण करवाया था। कलेक्टर ने डीईओ को निर्देशित करते हुए मामले के निराकरण के आदेश दिए थे। विकासखंड शिक्षा कार्यालय से बिल, कोषालय भेजे गए। जिसमें कुछ लोगों के बिल निकल गए है। लेकिन कुछ लोगों के बिल में कोषालय अधिकारी 1980 के आदेश का हवाला दे रहे हैं और एक बार में भी बिल निकालने की बात कह रहे हंै। जो अप्रासंगिक और गलत है। उन्होंने बताया कि सेनि शिक्षकों के अवकाश नगदीकरण में वर्ष 1980 का आदेश तब प्रासंगिक था, जब आहरण अधिकारियों को संपूर्ण अधिकार थे। लेकिन वर्ष 2008 में आदेश हुए कि 2008 के बाद की स्वीकृति विभागाध्यक्ष से ली जाएगी। इसके बाद प्रकरण जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त ने विभागाध्यक्ष को भेजे, किंतु तीन-चार वर्षो से स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई। जिससे देयक विलंब से आहरण में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जबकि अब 300 दिन का आदेश हो गया है, जिससे एक ही व्यक्ति के कई बार बिल निकालेंगे, लेकिन एक बार ही बिल निकाले जाने के कोषालय अधिकारी के निर्देश, केवल और केवल पेंशनर शिक्षकों को परेशान करने वाला है। जिसका हम विरोध करते हैं।

आमरण अनशन करेंगे शुरू
संयुक्त विभाग पेंशनर संघ प्रवक्ता सतीश दुबे ने बताया कि कलेक्टर के समस्या निराकरण के निर्देश के बाद कोषालय अधिकारी एक बार में ही देयक निकालने कह रहे है, जो त्रुटिपूर्ण और निराशाजनक है। जबकि हमारे पास ऐसे कई मामलेए उदाहरण के तौर पर है। जिनके कई बार देयक निकाले गए। हमारी प्रशासन से मांग है कि इस मामले में कोषालय अधिकारी को निर्देशित किया जाए और पेंशनर शिक्षकों की समस्या का निदान किया जाए। आगामी मंगलवार को भी हम इसी मांग को लेकर ज्ञापन सौपेंगे और इस मांग को पूरी करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया जाएगा। यदि इन 15 दिनों के भीतर शिक्षकों की समस्या का निराकरण नहीं किया जाता तो हम कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने टेंट लगाकर आमरण अनशन शुरू कर देंगे।

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