बालोद

सबसे पहले बनी योजना, लेकिन 12 साल से अटका पड़ा है बालोद बायपास, जानें क्या है कारण?

Balod Bypass Project: बालोद का 40 करोड़ रुपए का तरौद-दैहान बायपास प्रोजेक्ट 12 साल बाद भी अधूरा है। वन विभाग की एनओसी और जमीन की कमी के कारण निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।

3 min read
May 30, 2026
Balod Bypass Project(photo-patrika)

Balod Bypass Project: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और शहर को भारी वाहनों के दबाव से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित तरौद-दैहान बायपास परियोजना पिछले 12 वर्षों से फाइलों में अटकी हुई है। लगभग 40 करोड़ रुपए की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2012 में शासन स्तर से मंजूरी मिली थी और वर्ष 2016 में इसकी प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई थी।

इसके बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। करीब 7.80 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी प्रस्तावित बायपास सड़क को जिले के सबसे पुराने अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि सबसे पहले स्वीकृत होने के बावजूद यह परियोजना आज भी अधूरी है।

ये भी पढ़ें

हॉस्टल, भोजन और कोचिंग सब Free! सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए सुनहरा मौका, IIT-NEET की तैयारी करना हुआ आसान

Balod Bypass Project: वन भूमि और एनओसी बना सबसे बड़ा रोड़ा

परियोजना के मार्ग में लगभग 6 हेक्टेयर वन भूमि आ रही है। इसके अलावा बायपास निर्माण के लिए 4 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। वन संरक्षण नियमों के अनुसार एक पेड़ की कटाई के बदले 10 पौधे लगाने अनिवार्य हैं। यानी 4 हजार पेड़ों के बदले करीब 40 हजार पौधों का रोपण करना होगा। इसके लिए वन विभाग को लगभग 20 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, लेकिन राजस्व विभाग अब तक यह भूमि उपलब्ध नहीं करा पाया है। यही वजह है कि वन विभाग द्वारा आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी नहीं किया जा सका है।

पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिलने का इंतजार

परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के पर्यावरण संबंधी प्रावधानों के तहत अनुमति लेना भी आवश्यक है। पीडब्ल्यूडी द्वारा पेड़ों की कटाई संबंधी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने 44 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है, जिसमें पौधरोपण की गारंटी, वैकल्पिक वन क्षेत्र और पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी जानकारी शामिल है।

जब तक इन सभी बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक अंतिम मंजूरी मिलना संभव नहीं है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज और रिपोर्ट वन विभाग को सौंप दी गई है। अब विभागीय अनुमति मिलने के बाद ही तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

12 साल बाद भी नहीं मिला जवाब, कब पूरा होगा प्रोजेक्ट?

स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह परियोजना कब पूरी होगी। 2012 में स्वीकृति मिलने के बाद एक दशक से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज भी निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं हो सकी है। हर वर्ष प्रशासनिक बैठकों और विभागीय पत्राचार में इस परियोजना का उल्लेख होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती। वन विभाग, राजस्व विभाग और पीडब्ल्यूडी के बीच समन्वय की कमी के कारण परियोजना लगातार पीछे खिसकती जा रही है।

बायपास बनने से शहर को मिलेगी बड़ी राहत

बालोद शहर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव के कारण मुख्य मार्गों पर जाम और दुर्घटनाओं की समस्या गंभीर होती जा रही है। वर्तमान में दल्लीराजहरा, दुर्ग-झलमला, धमतरी, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा की ओर जाने वाले भारी वाहन शहर के भीतर से होकर गुजरते हैं। ट्रक, हाईवा और मेटाडोर जैसे भारी वाहनों की आवाजाही के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कई बार स्कूल, बाजार और रिहायशी इलाकों के पास भी यातायात बाधित होता है। बायपास निर्माण पूरा होने के बाद इन भारी वाहनों को शहर के बाहर से डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे मुख्य सड़कों पर दबाव कम होगा और आवागमन अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगा।

दुर्घटनाओं पर भी लगेगी रोक

शहर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। बस स्टैंड क्षेत्र, पेट्रोल पंप के सामने तथा गंजपारा से झलमला मार्ग के बीच कई गंभीर हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी वाहनों को शहर से बाहर निकालने पर दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। यही कारण है कि स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस परियोजना के शीघ्र निर्माण की मांग कर रहे हैं।

नेशनल हाईवे-930 से जुड़ेगा बायपास

पीडब्ल्यूडी की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार प्रस्तावित तरौद-दैहान बायपास का सीधा संपर्क नेशनल हाईवे-930 से होगा। दोनों परियोजनाएं एक-दूसरे की पूरक मानी जा रही हैं। बायपास और हाईवे कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

विभाग का दावा- जल्द मिलेगी जमीन

वन विभाग के डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि पौधरोपण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि भूमि उपलब्ध होते ही आगे की औपचारिकताएं पूरी कर परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

जनता की उम्मीदें अब भी कायम

बालोद जिले की सबसे पुरानी और बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में शामिल तरौद-दैहान बायपास को लेकर लोगों की उम्मीदें अब भी बरकरार हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो जाए तो वर्षों से लंबित यह परियोजना जल्द धरातल पर उतर सकती है और शहर को जाम, प्रदूषण तथा दुर्घटनाओं की समस्या से राहत मिल सकती है।

Updated on:
30 May 2026 11:58 am
Published on:
30 May 2026 11:53 am
Also Read
View All