
सतीश रजक। Chhattisgarh Stonehenge Karkabhat: बालोद जिले की धरा पर दफ़न करीब 5000 साल पुराना प्रागैतिहासिक इतिहास अब वैश्विक सुर्खियां बटोर रहा है। जिला मुख्यालय से 16 किमी दूर बालोद-धमतरी मार्ग पर स्थित 'करकाभाट महापाषाणिक कब्र समूह' को देखकर हाल ही में छत्तीसगढ़ पहुंची दक्षिण कोरियाई वैज्ञानिकों की टीम भी हैरान रह गई। इंग्लैंड के सुप्रसिद्ध स्टोनहेंज जैसी अनूठी संरचना के कारण विशेषज्ञ अब इसे भारत का स्टोनहेंज कह रहे हैं।
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह समूचे एशिया का सबसे बड़ा महापाषाणिक कब्र समूह है, जो प्राचीन आदिम समाज की बेजोड़ इंजीनियरिंग और खगोलीय ज्ञान का जीता-जागता प्रमाण है। लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में फैले इस ऐतिहासिक स्थल पर 5000 से अधिक प्रागैतिहासिक कब्रें मौजूद हैं।
देश में इस तरह के स्थल केवल मणिपुर, नागालैंड और पड़ोसी देश अफगानिस्तान में मिले हैं, लेकिन विशालता के मामले में करकाभाट सबसे आगे है। यहां एकल, सामूहिक और संयुक्त रूप से कुल 7 श्रेणियों की कब्रें पाई गई हैं। यहां के कई टन वजनी पत्थरों को पिरामिड की तरह एक के ऊपर एक बेहद कुशलता से सजाया गया है।
सबसे विस्मयकारी बात यह है कि हर पत्थर को सिर्फ एक तरफ से तराशा गया है और वह तराशा हुआ हिस्सा हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहता है। इसके अलावा, पूर्व-पश्चिम दिशा में झुके हुए ये पाषाण स्तंभ इशारा करते हैं कि आदिम काल के लोग सूर्य की गति से समय और मृत्यु के कालक्रम की गणना करते थे।
वर्ष 1990-91 में दिल्ली और रायपुर पुरातत्व विभाग द्वारा की गई संयुक्त खुदाई में यहां लोहे के प्राचीन हथियार और काले-लाल मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) मिले थे। इसके बाद प्रख्यात पुरातत्ववेत्ता प्रोफेसर अरुण कुमार शर्मा के शोध और पास के ही कुलिया-कनेरी गांव में हुई खुदाई से 30 बहुमूल्य सोने के सिक्के प्राप्त हुए। इनमें से 25 सिक्के नल राजवंश के प्रतापी राजा भवदत्त और महेंद्रदित्य के काल के हैं, जिन्हें वर्तमान में रायपुर संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।
दुर्भाग्य से, पुरातत्व विभाग के संरक्षण और फेंसिंग के दावों के बावजूद यह अनमोल धरोहर आज उपेक्षा की शिकार है। असामाजिक तत्वों द्वारा यहां सुरक्षा घेरा तोड़कर शराबखोरी की जा रही है और ऐतिहासिक पत्थरों की चोरी भी बदस्तूर जारी है। कई महत्वपूर्ण कब्र समूह तो आज भी फेंसिंग के दायरे से बाहर हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
जिले के इतिहासकार अरमान अश्क, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश और विभिन्न स्थानीय संस्थाओं ने सरकार से इस स्थल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की मांग की है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि यहां मुकम्मल सुरक्षा, एक आधुनिक सूचना केंद्र और पर्यटक सुविधाएं विकसित की जाएं, तो करकाभाट न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।