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ये है सरकारी स्कूल की हकीकत! टपकती छत के नीचे पढ़ रहे मासूम, बालोद के इन स्कूलों की तस्वीरें चौंका देंगी

School Building Damage: बालोद जिले के अंडी गांव की प्राथमिक शाला जर्जर भवन और कमरों की कमी से जूझ रही है। एक ही कमरे में तीन कक्षाओं की पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि कई बच्चे बरामदे में बैठने को मजबूर हैं।
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Chhattisgarh Govt. School

Chhattisgarh Govt. School: ये है सरकारी स्कूल की हकीकत(photo-patrika)

Chhattisgarh Govt. School: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डोंडीलोहारा विकासखंड के अंडी गांव स्थित प्राथमिक शाला की बदहाल स्थिति सामने आई है। जर्जर भवन और कमरों की कमी के कारण बालवाड़ी, पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई एक ही कमरे में कराई जा रही है। कई छात्र-छात्राओं को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए नए भवन के निर्माण या तत्काल मरम्मत की मांग की है।

Chhattisgarh News: एक कमरे में तीन कक्षाएं, पढ़ाई हो रही प्रभावित

स्कूल में पर्याप्त कक्ष नहीं होने के कारण एक ही कमरे के दोनों ओर ब्लैकबोर्ड लगाकर अलग-अलग कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। शिक्षक एक साथ तीन कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं, लेकिन शोर-शराबे और सीमित जगह के कारण बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर नहीं लग पाता। इसका सीधा असर उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

जर्जर भवन से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा

स्कूल भवन की हालत काफी खराब हो चुकी है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जिससे कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। मानसून के मौसम में बच्चों और शिक्षकों को हर समय किसी हादसे का डर बना रहता है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को स्कूल भेजना भी चिंता का विषय बन गया है।

बरामदे में चल रही पढ़ाई

कमरों की कमी के कारण कई बच्चों की कक्षाएं स्कूल के बरामदे में लगाई जा रही हैं। तेज धूप, बारिश और अन्य मौसम संबंधी परेशानियों के बीच पढ़ाई करना छात्रों के लिए चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से भवन निर्माण या मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

जिले के कई स्कूलों की हालत भी चिंताजनक

जानकारी के अनुसार, यह समस्या केवल अंडी गांव तक सीमित नहीं है। बालोद जिले में करीब 60 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, जहां बच्चे जोखिम के बीच शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभाग और पंचायत को कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन स्थिति में अब तक सुधार नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने की नए भवन की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द नए स्कूल भवन के निर्माण या पुराने भवन की मरम्मत की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक करता है।