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बालोद का युवा किसान बना ‘खेती का गुरु’, हर रविवार देता है मुफ्त प्रशिक्षण, जानें 3 एकड़ से 23 एकड़ तक का सफर

Agriculture Success Story: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के युवा किसान गोविंदा पटेल ने खेती को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने का माध्यम बना दिया है।
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बालोद

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Khyati Parihar

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सतीश रजक

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Updated: 9 Jul 2026, 12:48 PM IST

Chhattisgarh News

युवा किसान गोविंदा पटेल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

बालोद@ सतीश रजक। Young Farmer Chhattisgarh: रविवार की सुबह… न स्कूल का ब्लैकबोर्ड, न क्लासरूम और न ही किताबों का बोझ। नर्सरी में बना कमरा ही कक्षा है, फसलें ही प्रयोगशाला हैं और किसान ही विद्यार्थी। यह अनोखी 'खेती की पाठशाला' है, जिसे बालोद जिले के अर्जुंदा निवासी 34 वर्षीय युवा किसान गोविंदा पटेल चला रहे हैं। यहां किसानों को मिट्टी की पहचान से लेकर फसल कटाई और बाजार तक की पूरी जानकारी निशुल्क दी जाती है।

कृषि महाविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंदा ने नौकरी के बजाय खेत को चुना। तीन एकड़ से शुरू हुई उनकी खेती आज 23 एकड़ तक पहुंच चुकी है। टमाटर, मिर्च और पपीते की आधुनिक खेती से सफलता हासिल करने के बाद अब उनका लक्ष्य दूसरे किसानों को भी उन्नत बनाना है।

खेत ही क्लास, किसान ही छात्र

ग्राम अछोली स्थित अपनी नर्सरी में गोविंदा हर रविवार एक से दो घंटे की कृषि पाठशाला लगाते हैं। यहां 20 किसानों के लिए सीटें तय रहती हैं। प्रशिक्षण में मिट्टी परीक्षण, पौध तैयार करना, सिंचाई प्रबंधन, उर्वरक और दवा का वैज्ञानिक उपयोग, रोग नियंत्रण और फसल कटाई तक की पूरी प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से समझाई जाती है।

नौकरी छोड़ी, खेती को बनाया मिशन

वर्ष 2014 में कृषि महाविद्यालय अंबिकापुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंदा ने निजी कंपनी में फील्ड ऑफिसर की नौकरी की, लेकिन एक साल बाद गांव लौट आए। वर्ष 2015 में 11 एकड़ में पपीता और टमाटर की खेती शुरू की। मेहनत रंग लाई और आज वे 23 एकड़ में आधुनिक खेती कर रहे हैं।

एक खेत से कई परिवारों का सहारा

गोविंदा की खेती से सीजन में 30 से 40 लोगों को रोजगार मिलता है। वर्तमान में भी 20 से अधिक लोग उनके खेतों में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

जो सीखा, अब वही किसानों को सिखा रहा हूं"

गोविंदा पटेल कहते हैं कि कृषि की पढ़ाई के दौरान जो ज्ञान मिला, उसे अपने तक सीमित रखना ठीक नहीं लगा। मेरा प्रयास है कि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, लागत घटाएं और आय बढ़ाएं। इसलिए हर रविवार निशुल्क प्रशिक्षण देता हूं।

गोविंदा पटेल जैसे युवा किसान जिले के लिए प्रेरणा हैं। आधुनिक खेती में सफलता के साथ वे दूसरे किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। यह सराहनीय पहल है। - सूर्य नारायण ताम्रकार, सहायक उप संचालक, कृषि विभाग