बालोद

अब घुमंतु बच्चे भी बनेंगे पढ़ लिखकर नवाब, इस जिले की शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव

घुमंतू बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे जिला प्रशासन नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में बाल समिति का गठन किया जाएगा।

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Apr 17, 2018

बालोद. घुमंतू बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए जिला प्रशासन नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके लिए ग्राम पंचायतों के बाद नगरीय निकाय क्षेत्रों में बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा। निकाय सीएमओ, एसडीएम, तहसीलदार इस समिति के सदस्य रहेंगे, जो मैदानी स्तर पर ऐसे बच्चों पर नजर रखेंगे।

विभाग तैयारी में जुटा
इस योजना पर काम करने के लिए राज्य बाल संरक्षण समिति ने यह आदेश बालोद जिला बाल संरक्षण अधिकारी को दिए हैं। आदेश के बाद अब विभाग इसकी तैयारी में लग गया है। नगरीय निकाय क्षेत्र में बाल संरक्षण समिति का अध्यक्ष नगरीय निकाय के अध्यक्ष होंगे, तो सदस्य नगरीय निकाय के सीएमओ, एसडीएम, तहसीलदार भी इस समिति के सदस्य रहेंगे।

भविष्य संवारने मैदानी स्तर पर ऐसे बच्चों पर रखी जाएगी नजर
जानकारी के मुताबिक मैदानी स्तर पर घुमन्तु बच्चों का भविष्य संवारने के उद्देश्य से उसकी देख-रेख करने उन पर निगरानी रखते हुए ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩा है। इसके लिए नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी यह अभियान चलाया जाएगा, क्योंकि पहले ग्राम पंचायत स्तर पर इस समिति का गठन किया गया था। इस समिति के गठन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है। यह अभियान सफल होने के बाद इसे नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी लागू करने का आदेश दिया गया है।

वार्ड स्तर पर भी करेंगे समिति तैयार
इसमें सहायता मिले इसके लिए नगर के विभिन्न वार्डों में भी वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाएगा। इसमें समिति का अध्यक्ष वार्ड के पार्षद होंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्कूल के प्राचार्य, प्रधान पाठक, मितानिन, एएनएम व महिला समूह तथा स्कूल का एक छात्र व एक छात्रा को भी इस समिति का सदस्य बनाया जाएगा।

ये है इस समिति का काम
वार्डों व नगर में इन समितियों की हर तीन माह में बैठक रखी जाएगी, जो घुमन्तु व स्कूल नहीं जा रहे बच्चों को चिन्हांकित करेंगे। उसके बाद इन बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौपा जाएगा। समिति के माध्यम से बच्चों के अवैध प्रवास, मानव व्यापार की रोकथाम के लिए जन जागरूकता लाया जाएगा।

लैंगिक अपराध में पीड़ित बच्चों की जानकारी के बाद उनका संरक्षण तथा बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की जानकारी लोगों को दी जाएगी। साथ ही बाल विवाह, अनिवार्य शिक्षा, बाल श्रम, पलायन, स्कूल ड्राप आउट बच्चों के स्वास्थ्य के स्थिति की मॉनिटरिंग की जाएगी।

नगरीय निकाय क्षेत्रों में की जा रही पहल
जिला बाल संरक्षण श्रम अधिकारी गजानंद साहू ने बताया ग्राम पंचायत स्तर से यह पहल शुरू हुई है जो सफल रहा। इसी वजह से अब यह पहल नगरीय निकाय क्षेत्रों में भी की जा रही है। आगामी माह में जिले के सभी निकायों में बाल संरक्षण टीम गठित हो जाएगी।

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Published on:
17 Apr 2018 10:00 am
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