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10वीं में फेल होने का सदमा, 17 साल की छात्र ने फांसी लगा कर दी जान, दो साल की नाकामी से टूटा हौसला

CG Suicide News: बालोद में 10वीं की परीक्षा में लगातार असफलता से परेशान 17 वर्षीय छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे पूरे इलाके में शोक और परीक्षा के दबाव पर चिंता बढ़ गई है।

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10वीं में फेल होने का सदमा, 17 साल की छात्र ने फांसी लगा कर दी जान, दो साल की नाकामी से टूटा हौसला(photo-patrika)

10वीं में फेल होने का सदमा, 17 साल की छात्र ने फांसी लगा कर दी जान, दो साल की नाकामी से टूटा हौसला(photo-patrika)

CG Suicide News: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 10वीं की परीक्षा में लगातार असफलता से परेशान एक 17 वर्षीय छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना डौंडी थाना क्षेत्र के बंधिया पारा की है, जिसने न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और परीक्षा के दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

CG Suicide News: दो साल से असफलता का दबाव

मृतक की पहचान राजवीर बघेल (17) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार राजवीर पिछले दो वर्षों से 10वीं की परीक्षा में असफल हो रहा था। पहले साल वह 6 विषयों में फेल हुआ था, जबकि इस वर्ष भी वह 5 विषयों में पास नहीं हो सका। लगातार असफलता के कारण वह मानसिक रूप से बेहद तनाव में था।

तनाव के चलते उठाया आत्मघाती कदम

परिजनों के मुताबिक परीक्षा परिणाम आने के बाद से ही राजवीर काफी परेशान और चुप-चुप रहने लगा था। आशंका जताई जा रही है कि इसी मानसिक दबाव और निराशा के चलते उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

परिजनों ने देखा तो मचा हड़कंप

घटना का खुलासा तब हुआ जब परिजनों ने उसे घर के भीतर फंदे से लटका देखा, जिसके बाद घर में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही डौंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के पीछे परीक्षा में असफलता से उपजा मानसिक तनाव मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है, ताकि घटना के हर पक्ष को स्पष्ट किया जा सके।

परीक्षा के दबाव पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते परीक्षा दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीख के रूप में देखना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाएं और दबाव डालने के बजाय उन्हें भावनात्मक सहारा देना जरूरी है। समय पर संवाद और सहयोग से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।