बलोदा बाज़ार

जीरो पॉवर कट वाले राज्य में लोग चिमनी की भरोसे काट रहे रात, नई सरकार से उम्मीद

इस सच्चाई से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि इन घोषणाओं का सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।
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जीरो पॉवर कट वाले राज्य में लोग चिमनी की भरोसे काट रहे रात, नई सरकार से उम्मीद

मैनपुर. छत्तीसगढ़ में जीरो पॉवर कट को लेकर चाहे कितने ही अलग अलग तरह की दावें हों, लेकिन बिजली की उपलब्धता और गांव-गांव में विद्युतिकरण की जमीनी हकीकत कुछ और कहानी ही बया करती है। मगर इस सच्चाई से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि इन घोषणाओं का सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है।

जीरो पावर कट वाले राज्य के गांवों में आज भी मिटटी के तेल वाली चिमनी लालटेन जलते हैं। अगर यकीन न आये तो गरियाबंद जिला के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के गांवों में पहुंचकर वास्तु स्थिति से अवगत हुआ जा सकता है। जहां आजादी के सात दशक बाद भी बिजली नही पहुंची हैं, राज्य गठन को 18 वर्ष हो गए, तो वहीं गरियाबंद जिला बने 6 वर्ष हो जाने के बाद भी जिला मुख्यालय से महज 50 किलो मीटर दूर के गांव में बिजली नहीं लग पाई है।

बिजली के अभाव में गांवों का विकास कार्य थम गया है। रात के अंधेरे में गांवों के लोगों की जिदंगी नारकीय बन जाती है। रात के अंधेरे में जहरीले जीव जंतुओं का डर हमेशा सताता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती हैं। चिमनी और लालटेन की रोशनी में यहां के बच्चे अपने भविष्य गढ़ रहे हैं। लगातार मांग करने के बावजूद इस ओर प्रशासन गंभीरता नहीं दिखती, जिसको लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश हैं। शासन द्वारा कुछ बिजली विहीन ग्रामों में वर्षों पूर्व सौर ऊर्जा प्लेट लगाकर गांवों में रोशनी देने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी यह कोशिश भी सफल नहीं हो सकी। नतीजा सौर ऊर्जा की प्लेटें खराब हो गई, बैटरियां सड़ गईं। जहां सब ठीक है वहां के ग्रामीणों को महज एक-दो घंटे ही बिजली नसीब हो रही है। बाकी पूरी रात अंधेरे में गुजारना पड़ता है। कुल मिलाकर आज भी वे लालटेन युग में जीने के मजबूर हैं।

मैनपुर आदिवासी विकासखंड क्षेत्र के जुनापारा, कोसममुड़ा, कन्हारपारा, रावपारा, नदीपारा, जोधराभर्री, कुशियारबरछा, लहपीपारा, करेली, खम्हनपारा, नवापारा, कमारपारा, रक्शापथरा, ढोलसरई, शुक्लाभाठा, भुतबेड़ा, भीमाटीकरा, बाहरापारा, मोतीपानी, मोंगराडीह, भालुपानी, कुचेंगा, भाठापानी, गांजीमुड़ा, महुआनाला, गरीबा, ईचरादी, टांगापानी, कोकड़ी, डुमरबुडऱा, छिन्दभर्री, चिपरी, नगबेल, बरगांव, टंगराज, गरहाडीह, कांदाखोदरा, खरताबेड़ा, डोगरीपारा, धोबनडीह, नदीपारा, बोईरडीह, घोटियाभर्री, गौरगांव, धवईभर्री, गेंदराबेड़ा, लाटापारा, कछारपारा, झोलाराव, जुगाड, तौरेंगा, अमाड, साहेबिनकछार, नागेश, देवझरअमली, कुमकोट, डूमरपडाव, ताराझर, डडईपानी, मटाल, भालूकोना, जांगड़ा, पायलीखण्ड, कोदोमाली सहित 50 से ज्यादा गांवों पारा टोला मे ंआज तक बिजली नहीं लग पाई हैं।

पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार प्रदेश के सुदुर वनांचलों से लेकर पहाड़ पर्वतों तक बसे छत्तीसगढ़ के अंतिम व्यक्ति तक बिजली पहुंचाने के दावों के साथ जमकर बिजली त्यौहार मनाया था। किन्तु गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखण्ड मैनपुर ब्लॉक के बड़ी संख्या में अनेकों ऐसे ग्राम हैं, जहां के लोगों को आज भी बिजली की दरकार है। ऐसे अनेक ग्रामों के ग्रामीण अपने गांवों तक बिजली पहुंचने की उम्मीद वर्षों से पाले हुए है। अब इन ग्रामों के ग्रामीणंों को छत्तीसगढ में 15 वर्षों के बाद सत्ता में आई कांग्रेस के मुखिया भूपेश बघेल से उम्मीद है की वे जल्द ही बिजली विहीन इन ग्रामों बिजली पहुचाएंगे।

Published on:
07 Jan 2019 07:01 pm