
बलरामपुर. प्रदेश की योगी सरकार चाहे जितने सुशासन के दावे करें परंतु यूपी पुलिस सुधरने वाली नहीं है। यूपी पुलिस का एक और अमानवीय चेहरा उस समय सामने आया जब जनपद बलरामपुर के थाना ललिया की चौकी मथुरा बाजार के एक सिपाही ने पास के गांव के एक युवक को सरेराह जमीन पर पटक-पटक कर बुरी तरह मारा। युवक की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने फर्जी रूप से पकड़ कर लाए एक नाबालिग 10 वर्षीय बच्चे के पक्ष में आवाज उठाई थी।
अपने कार्मों के बजाय कारनामों के लिए पहचानी जाने वाली यूपी पुलिस का ये रूप थाना ललिया के चौकी मथुरा बाजार में उस समय देखने को मिला, जब थाना ललिया क्षेत्र के ग्राम चैसार निवासी अक्षय शुक्ला की पुलिस चौकी मथुरा बाजार के एक सिपाही ने सरे राह पकड़ कर पटक-पटक कर बुरी तरह से पिटाई की। युवक की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने पुलिस द्वारा एक नाबालिग बच्चे को दरोगा के सर्विस रिवाल्वर की चोरी के जुर्म में पकड़ कर लिए जाने पर सवाल उठाया था। चौकी में युवक ने पूछा था कि जब पुलिस अपने रिवॉल्वर की सुरक्षा नहीं कर सकती तो फिर वह आम जनता की सुरक्षा कैसे करेगी।
यहां यह बताना आवश्यक है कि गत 20 नवंबर को डायल 100 पर तैनात एक दरोगा का सर्विस रिवॉल्वर उन्हीं की गाड़ी से दिन में चोरी हो गया था। उसी सिलसिले में पूछताछ के लिए है मथुरा मजार पुलिस ने चैसार गांव के एक 10 वर्षीय नाबालिग बच्चे को पूछताछ के लिए पुलिस चौकी ले आई थी। पकड़े गए बच्चे की मां के कहने पर अक्षय मथुरा चौकी में आया था, जहां पर सच बात करने के जुर्म में उसकी धुनाई कर दी गई । बताया जा रहा है कि पिटाई करने वाले सिपाही बलराम गौड़ का आम जनता के साथ व्यवहार सही नहीं है। क्षेत्र के लोग बलराम गौड़ के व्यवहार से काफी खफा हैं।