Banda News:बुंदेलखंड के ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग में 25 करोड़ की ऋषिकुलम् गुरुकुल परियोजना प्रस्तावित है। 18 बीघा में वेद, उपनिषद, संस्कृत, आयुर्वेद, योग और पंचकर्म की समन्वित शिक्षा-चिकित्सा होगी। पहले चरण में 400 विद्यार्थी, हॉस्टल सुविधा, स्वास्थ्य-पर्यटन और पीपीपी मॉडल पर होटल-रिसॉर्ट से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी। प्रकृति आधारित वास्तु, ध्यान मंडप और जैविक कृषि भी विकसित होंगी।
बांदा। बुंदेलखंड की वीरता का प्रतीक कालिंजर दुर्ग अब इतिहास की सीमाओं से निकलकर भविष्य की राह पर कदम रखने जा रहा है। जिस धरती ने युद्धों की गर्जना सुनी, वहीं अब वेदों की ऋचाएं, योग की श्वासें और आयुर्वेद की औषधियां जीवन को नई दिशा देंगी। जिला पंचायत की 18 बीघा भूमि पर प्रस्तावित ऋषिकुलम् गुरुकुल परियोजना शौर्य और शांति का अद्भुत संगम बनने जा रही है। करीब 25 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना को शासन की मंजूरी लगभग मिल चुकी है।
ज्ञान परंपरा,साधना का जीवंत तीर्थ बनेगा -
ऋषिकुलम् केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होगा, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, साधना और स्वास्थ्य का जीवंत तीर्थ बनेगा। यहां वेद, उपनिषद और संस्कृत के साथ आयुर्वेद, योग, प्राणायाम और पंचकर्म उपचार एक ही परिसर में साधकों और विद्यार्थियों को आत्मिक व शारीरिक संतुलन देंगे। परियोजना की वास्तुकला पंचमहाभूतों पर आधारित होगी। मंडलाकार परिसर के केंद्र में ध्यान मंडप स्थापित किया जाएगा, जहां अध्ययन और साधना एक साथ प्रवाहित होंगे। चारों ओर औषधीय पौधों की वाटिका, जल संरचनाएं, खुले प्रांगण और प्राकृतिक सामग्री से बने भवन होंगे, ताकि प्रकृति स्वयं शिक्षक बन सके।
400 बच्चों को गुरुकुल पद्धति से दी जाएगी शिक्षा -
पहले चरण में 400 बच्चों को गुरुकुल पद्धति से शिक्षा दी जाएगी। उनके लिए आवासीय हॉस्टल की व्यवस्था होगी, जहां जीवन-प्रबंधन, पर्यावरण संतुलन और भारतीय दर्शन को व्यवहार में उतारना सिखाया जाएगा। आयुर्वेदिक पंचकर्म इकाई न केवल विद्यार्थियों बल्कि स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले रोगियों को भी प्राकृतिक उपचार उपलब्ध कराएगी, जिससे स्वास्थ्य-पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
होटल और रिसॉर्ट किए जाएंगे विकसित -
पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार देने के लिए ऋषिकुलम् के समीप पीपीपी मॉडल पर होटल और रिसॉर्ट विकसित किए जाएंगे। जिला पंचायत देश के प्रमुख होटल समूहों से संपर्क में है। अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल का कहना है कि यह परियोजना कालिंजर को केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि ज्ञान और आरोग्य की वैश्विक पहचान दिलाएगी।