
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने शुक्रवार को कहा कि सूखा शमन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राजस्व मंडल के लिए वरिष्ठ मंत्रियों की चार मंत्रिमंडलीय उप-समितियों का गठन करने का निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने 24 जिलों के 100 तालुकों को सूखाग्रस्त अधिसूचित किया है।
राजस्व मंत्री आरवी देशपांडे ने कहा कि सूखा शमन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए उपायुक्तों द्वारा सूखा राहत कार्यों की समीक्षा की जाएगी और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सरकार ने प्रत्येक राजस्व प्रभाग के लिए चार मंत्रिमंडलीय उप-समितियों का गठन करने का निर्णय लिया है जिसमें वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त सचिव या प्रधान सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को उप-समिति में समन्वय अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए शामिल किया जाएगा।
समितियों द्वारा सूखा प्रभावित जिलों का दौरा किया जाएगा और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठकें होंगी। साथ ही उपायुक्तों को सूखा राहत उपायों पर सुझाव दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में शुष्क मौसम की स्थिति बरकरार है और रबी मौसम में 49 प्रतिशत कम बारिश है। इसलिए सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए सरकार जिम्मेदार है और मुख्य रूप से लोगों को रोजगार मुहैया कराना तथा पेयजलापूर्ति एवं पशुओं के लिए चारा सुनिश्चित करने पर ध्यान होगा।
उन्होंने कहा कि सूखा राहत के लिए पर्याप्त फंड है और राहत कार्यों के लिए 220 करोड़ रुपए सुरक्षित हैं जिसका उपयोग उपायुक्त स्तर पर हो सकता है। इसके अतिरिक्त 50 लाख रुपए ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग द्वारा प्रत्येक सूखा प्रभावित तालुक के लिए स्वीकृत है जिसे मुख्य रूप से पेयजलापूर्ति पर खर्च किया जाना है।
मौजूदा समय में 13 जिलों के 197 गांवों में टैंकर से जलापूर्तिकी जा रही है। वर्ष 2018 के खरीफ सत्र के दौरान सूखे और बाढ़ का जिक्र करते हुए देशपांडे ने कहा कि 10 सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने 17-9 नवंबर तक राज्य के 13 सूखा प्रभावित जिलों का दौरा किया था। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक केन्द्रीय टीम अपनी रिपोर्ट सौंप देगी और हमें भरोसा है कि राज्य को केंद्र से राहत राशि जल्द मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडलीय उप समिति ने 31 मई 2019 तक अन्य राज्यों में चारा परिवहन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।