बैंगलोर

सीपीसीबी पर एंडोसल्फान पर लीपापोती के आरोप

उन्होंने दावा किया कि केरल के प्लांटेशन कॉरपोरेशन (पीसीके) क्षेत्र के भीतर एक कुएं में 600 लीटर एंडोसल्फान Endosulfan अवैज्ञानिक तरीके से डाला गया था, जिससे नेट्टनिगे सहित कर्नाटक के आस-पास के गांवों में भूजल प्रदूषित हो सकता है।
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Updated: 26 Nov 2024, 8:25 PM IST
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ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन फाउंडेशन (एचआरपीएफ) के अध्यक्ष डॉ. रवींद्रनाथ शानभोग ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) पर कासरगोड के मिनचिनपदावु में जहरीले एंडोसल्फान की मौजूदगी के बारे में जनता और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को गुमराह करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने सोमवार को उडुपी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, दो दिसंबर को एनजीटी NGT को प्रस्तुत की जाने वाली सीपीसीबी की रिपोर्ट, गहरे संदूषण की जांच किए बिना सतही मिट्टी और पानी के परीक्षण पर आधारित है। उन्होंने दावा किया कि केरल के प्लांटेशन कॉरपोरेशन (पीसीके) क्षेत्र के भीतर एक कुएं में 600 लीटर एंडोसल्फान Endosulfan अवैज्ञानिक तरीके से डाला गया था, जिससे नेट्टनिगे सहित कर्नाटक के आस-पास के गांवों में भूजल प्रदूषित हो सकता है।

सेवानिवृत्त पीसीके सुरक्षा कर्मचारी अच्युत मनियानी द्वारा 2013 में दिए गए वीडियो साक्ष्य का हवाला देते हुए, डॉ. शानभोग ने कहा कि पीसीके के निर्देश पर रसायनों को दफनाया गया था। बारह वर्ष की बारिश ने सतह के निशान मिटा दिए होंगे, लेकिन गहराई से खुदाई करने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। घुले हुए डिब्बे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।

डॉ. शानभोग ने बताया कि नेट्टनिगे में छिड़काव का कोई असर नहीं हुआ, लेकिन 113 बच्चे शारीरिक विकलांगता के साथ पैदा हुए। यह प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के बाद बचे हुए एंडोसल्फान के निपटान में पारदर्शिता की कमी की भी आलोचना की। कार्यकर्ता दो दिसंबर को चेन्नई में एनजीटी की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अपनी चिंताएं व्यक्त करेंगे।

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26 Nov 2024, 8:25 PM IST
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