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कर्नाटक में न्यायिक सेवा की तैयारी के लिए बनेगा विशेष संस्थान, डीके शिवकुमार ने कहा- 15-20 एकड़ में तैयार होगा नया कैंपस

Karnataka Judiciary Exam: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए विशेष संस्थान बनाने की घोषणा की है। बेंगलुरु के रेसकोर्स परिसर में 15 से 20 एकड़ में नया कैंपस विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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Karnataka Judiciary Exam

कर्नाटक में न्यायिक सेवा की तैयारी के लिए बनेगा विशेष संस्थान, फोटो सोर्स- ANI

DK Shivakumar: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने न्यायिक सेवा की परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए राज्य में एक विशेष संस्थान और नया कैंपस स्थापित करने की घोषणा की है। बेंगलुरु के रेसकोर्स परिसर में 15 से 20 एकड़ जमीन पर यह कैंपस विकसित करने की योजना है। शिवकुमार ने कहा कि जिस तरह यूपीएससी, आईपीएस और पुलिस सेवाओं की तैयारी के लिए संस्थान मौजूद हैं, उसी तरह न्यायिक सेवा के अभ्यर्थियों के लिए भी विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।

डीके शिवकुमार शनिवार को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र में सवाल पूछने की आजादी, सार्वजनिक जवाबदेही और संविधान के प्रति जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताया।

‘नागरिकों को सरकार से सवाल पूछने की आजादी होनी चाहिए’

मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति सरकार की बात से सहमत हो। मजबूत लोकतंत्र वह है, जहां प्रत्येक नागरिक को सरकार से सवाल पूछने की स्वतंत्रता मिले। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनता की जवाबदेही और सरकार की जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। शिवकुमार ने युवाओं से अपील की कि वे सवाल पूछने, विचारों पर बहस करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें चुनौती देने से न डरें। साथ ही, उन्होंने कहा कि सवाल पूछने के साथ उनके जवाब खोजने की जिम्मेदारी उठाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

‘देश को ईमानदार और साहसी वकीलों की जरूरत’

कानून के विद्यार्थियों और पेशेवरों को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि भारत को केवल अधिक वकीलों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे वकीलों की आवश्यकता है जिनमें ईमानदारी, संवेदनशीलता और साहस हो। उन्होंने कहा कि कानून का ज्ञान किसी व्यक्ति को पेशेवर बनाता है, जबकि न्याय की समझ उसे नेतृत्व करने योग्य बनाती है। शिवकुमार ने वकीलों और नीति-निर्माताओं को संविधान का संरक्षक बताते हुए कहा कि संविधान के मूल्यों और सिद्धांतों की रक्षा करना उनकी विशेष जिम्मेदारी है।

कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा प्रस्ताव

न्यायिक सेवा की तैयारी के लिए प्रस्तावित संस्थान को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि नए कैंपस में युवाओं को परीक्षा की तैयारी और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को आगामी राज्य कैबिनेट बैठक में औपचारिक मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

विश्वविद्यालय के नए भवनों की रखी गई आधारशिला

इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू के साथ NLSIU के साउथ ब्लॉक, ऑडिटोरियम और स्टूडेंट सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को राज्य में न्यायिक सेवा के इच्छुक युवाओं के लिए विशेष शैक्षणिक और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की दिशा में एक प्रस्तावित पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

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