बैंगलोर

घोषणा बनकर रह गई गांधी मल्टीमीडिया परियोजना

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को अविस्मरणीय बनाने के लिए एक ओर पूरे देश में विविध प्रकार के कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है तो दूसरी ओर कर्नाटक सरकार अपनी महत्वाकांक्षी मल्टीमीडिया परियोजना को साकार करने में सुस्त पड़ गई है जो महात्मा गांधी के जीवन पर समर्पित रहने वाला था।
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Oct 01, 2018
घोषणा बनकर रह गई गांधी मल्टीमीडिया परियोजना
घोषणा बनकर रह गई गांधी मल्टीमीडिया परियोजना

बेंगलूरु. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को अविस्मरणीय बनाने के लिए एक ओर पूरे देश में विविध प्रकार के कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है तो दूसरी ओर कर्नाटक सरकार अपनी महत्वाकांक्षी मल्टीमीडिया परियोजना को साकार करने में सुस्त पड़ गई है जो महात्मा गांधी के जीवन पर समर्पित रहने वाला था।


कर्नाटक गांधी स्मारक निधि (केजीएसएन) ने वर्ष-2017 में कन्नड़ और संस्कृति विभाग के माध्यम से महात्मा गांधी मल्टीमीडिया परियोजना (एमजीएमपी) की स्थापना के लिए 10.5 करोड़ रुपए का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। योजना के तहत 11,000 वर्ग फीट के दायरे में एक मल्टीमीडिया संग्रहालय स्थापित करना था। केजीएसएन के अध्यक्ष वुडी. पी कृष्णा के अनुसार 10.5 करोड़ रुपए में से 4.5 करोड़ रुपए सिविल निर्माण कार्यों के लिए निर्धारित किया गया था और शेष राशि से डिजिटलीकरण होना था।


राज्य के पूर्व ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री (आरडीपीआर) एचके पाटिल इस परियोजना को लेकर काफी उत्सुक थे लेकिन विधानसभा चुनाव और बाद में राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। सूत्रों के अनुसार मौजूदा राज्य सरकार अब इस परियोजना के लिए फंड जारी करने को लेकर कोई उत्सुकता नहीं दिखा रही है।

केजीएसएन की योजना थी कि महात्मा गांधी की १५०वीं जयंती पर कर्नाटक एक नजीर पेश करे और 2 अक्टूबर 2019 को जनता के लिए महात्मा गांधी मल्टीमीडिया संग्रहालय खोला जाए। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करना अब असंभव प्रतीत होता दिख रहा है।


गौड़ा ने कहा कि यह परियोजना बहुभाषी और योजनाबद्ध थी जिससे यह सभी भाषा के लोगों के लिए सुलभ हो सके। इसके माध्यम से महात्मा गांधी के विचारों को दो भागों में आगंतुकों को पेश करना है। पहले हिस्से में गांधीजी के जीवन को चित्रित करना है जबकि दूसरा भाग देश को दिए उनके योगदान और उनकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर रहता। इसके लिए उनके जीवन से जुड़ी हजारों तस्वीरें एकत्र की गई हैं।

हालांकि फंड जारी नहीं होने से परियोजना की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। उन्होंने कहा कि फंड के अभाव में अब इसे तय समय पर क्रियान्वित करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिर भी अगर राज्य सरकार तुरंत जरूरी आवंटन करती है और ओवरटाइम काम किया जाता है तो इसे अगले वर्ष तय समय पर अक्टूबर-२०१९ में पूरा किया जा सकता है।

गांधी के आदर्शों के करीब लाना मकसद
गांधी भवन बेंगलूरु के उपाध्यक्ष तिपन्ना गौड़ा के अनुसार प्रस्तावित परियोजना पूरे दक्षिण भारतीय राज्यों में अपनी तरह की पहली परियोजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को प्रौद्योगिकी, चित्र, कार्टून, एनिमेशन और डिजिटलीकृत पाठ के माध्यम से महात्मा गांधी के आदर्शों के करीब लाना है। यह परियोजना प्रख्यात गांधीवादी और स्वतंत्रता सेनानी हो। श्रीनिवासय्या का सपना था जिन्होंने लंबे समय तक केजीएसएन के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

Updated on:
01 Oct 2018 05:53 am
Published on:
01 Oct 2018 05:53 am
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