सरकार ने शारीरिक शिक्षा (पीइ) को अनिवार्य विषय बनाया है, लेकिन शिक्षकों की भर्ती को लेकर वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बावजूद स्कूलों की संख्या के अनुपात में सरकारी प्राथमिक, हाई स्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में पीइ शिक्षकों Physical Education Teachers की भर्ती नहीं हो सकी है। इसके कारण खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां ठप […]
सरकार ने शारीरिक शिक्षा (पीइ) को अनिवार्य विषय बनाया है, लेकिन शिक्षकों की भर्ती को लेकर वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बावजूद स्कूलों की संख्या के अनुपात में सरकारी प्राथमिक, हाई स्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में पीइ शिक्षकों Physical Education Teachers की भर्ती नहीं हो सकी है। इसके कारण खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां ठप पड़ी हैं। राज्यभर में हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे अभ्यर्थियों और शिक्षा से जुड़े हितधारकों में नाराजगी है।
सीमित भर्ती
अधिकारियों और अभ्यर्थियों के अनुसार राज्य में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों के 4,000 से अधिक पद रिक्त हैं। हालांकि, सरकार ने केवल सीमित संख्या में पदों को भरने की पहल की है।
कर्नाटक में 48,465 सरकारी प्राथमिक स्कूल और 6,842 सहायता प्राप्त स्कूल हैं। इससे पहले 6,777 पीइ शिक्षक नियुक्त किए गए थे, लेकिन इनमें से 4,000 से अधिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इन रिक्त पदों को अब तक भरा नहीं गया है।हाल ही में सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में 703 पीइ शिक्षकों की भर्ती के लिए वित्त विभाग से मंजूरी ली है, जिनमें कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के 380 पद शामिल हैं। वहीं हाई स्कूल स्तर पर राज्यभर में 670 पदों को मंजूरी दी गई है, जिनमें कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के 216 पद हैं। यह लगभग दो दशकों के बाद इस श्रेणी में बड़ी भर्ती मानी जा रही है। अभ्यर्थियों की मांग है कि स्वीकृत पदों में कटौती किए बिना सभी स्कूलों और कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
पाठ्यपुस्तकें हैं, शिक्षक नहीं
सरकार कक्षा 8 से 10 तक के विद्यार्थियों को हर साल शारीरिक शिक्षा की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराती है, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के कारण कई स्कूलों में ये किताबें इस्तेमाल में नहीं आ पा रहीं। कुछ जगहों पर अन्य विषयों के शिक्षक खेल गतिविधियां संभाल रहे हैं, जबकि कई स्कूलों में अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यभार के चलते शारीरिक शिक्षा की अनदेखी हो रही है।
बेरोजगार स्नातकों की चिंता
राज्य सरकार द्वारा संचालित और मान्यता प्राप्त सीपीइडी (शारीरिक शिक्षा में प्रमाण पत्र) और बीपीइडी (शारीरिक शिक्षा में स्नातक) पाठ्यक्रम पूरा करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सुनिश्चित रोजगार नहीं मिल पा रहा है। कई को बेहद कम वेतन पर निजी स्कूलों में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अभ्यर्थियों ने छात्रावासों में वार्डन पदों पर भी उन्हें अवसर देने की मांग की है।
भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए सरकार
बेरोजगार शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील गोला ने कहा कि कल्याण कर्नाटक क्षेत्रीय विकास बोर्ड के तहत पर्याप्त धन उपलब्ध है और भर्ती की जा सकती है। भर्ती में देरी के कारण कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर रहे हैं। सरकार से भर्ती प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।