कर्नाटक की भूमि सदैव ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध रही है। यहां अनेक संतों, विद्वानों और चिंतकों ने जन्म लेकर समाज को दिशा दी है। हावेरी जैसे क्षेत्र में विश्वविद्यालय की स्थापना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बदलते और प्रतिस्पर्धी दौर में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, नवाचार की सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक है। केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि अवसरों का सृजन करने वाले बनें।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत Thawar Chand Gehlot ने सोमवार को हावेरी विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक, विज्ञान तथा नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान और डिजिटल क्रांति ने जीवन और कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है।
छात्रों को बड़े सपने देखने, ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने और निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक की भूमि सदैव ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध रही है। यहां अनेक संतों, विद्वानों और चिंतकों ने जन्म लेकर समाज को दिशा दी है। हावेरी जैसे क्षेत्र में विश्वविद्यालय की स्थापना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यपाल गहलोत ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। शिक्षा न केवल कौशल को बढ़ाती है, बल्कि व्यक्ति को अपने क्षेत्र में दक्ष बनाती है।
इस अवसर पर न्यायाधीश डॉ. अशोक बी. हिंचिगेरी, कुलपति सुरेश एच. जंगमशेट्टी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।