
बेंगलूरु. चीनी मिलों में बकाया धन दिलाने व गन्ने की खरीद के लिए लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग को लेकर बेलगावी में पिछले एक सप्ताह से आंदोलन कर रहे गन्ना किसानों ने शुक्रवार को जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार के ठोस आश्वासन पर आंदोलन खत्म कर दिया। किसानों ने उनकी मांगें पूरी करने के लिए सरकार को 15 दिन की मोहलत दी है। इससे संकट में घिरी गठबंधन सरकार को राहत मिल गई है।
सरकार के प्रतिनिधि के रूप में धरना स्थल पर पहुंचे शिवकुमार ने उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याएं अच्छी तरह समझती है। हालांकि चीनी विभाग उनके पास नहीं है लेकिन किसानों की समस्याओं को समझकर वे यहां आए हैं।
मुख्यमंत्री ने तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की तरफ से वे उनसे आंदोलन खत्म करने की अपील करते हैं। विरोध-प्रदर्शन करना तो ठीक है लेकिन कानून हाथ में लेना उचित नहीं है।
प्रदर्शनकारी किसानों ने चीनी मिलों में बकाया राशि के दस्तावेज मंत्री को दिखाए। इस पर शिवकुमार ने कहा कि चीनी मिलों में बकाया धन के संबंध में मुख्यमंत्री ने गुरुवार को दिन भर मिल मालिकों से चर्चा की और अनुबंधित दरों के अनुसार किसानों को पुराना बकाया के भुगतान के निर्देश दिए है। चीनी मिल मालिक भी बातचीत कर समस्या सुलझाने को तैयार हैं। लिहाजा आंदोलन वापस ले लिया जाना चाहिए। चालू वर्ष के गन्ने की कीमतों का भुगतान तय न्यूनतम लाभकारी मूल्य के आधार पर होगा। आंदोलन पर बैठे किसानों सरकार की पहली प्राथमिकता है।
कृषक महिला जयश्री व अन्य आंदोलनकारियों ने कहा कि उनके आश्वासन पर फिलहाल वे आंदोलन वापस ले रहे हैं लेकिन मांगे पूरी नहीं हुई तो दोबारा आंदोलन करने पर विवश हो जाएंगे। इसके बाद किसानों ने पिछले एक सप्ताह से जारी धरना समाप्त कर दिया। उधर, अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठे भारतीय कृषक समाज के अध्यक्ष सिद्दगौड़ा मोडगी ने आरोप लगाया कि चीनी मिल मालिकों ने जिलाधिकारी कार्यालय को बकाए के संदर्भ में गलत आंकड़ा दिया है। उन्होंने मांग की कि सरकार राज्य सलाहकारी मूल्य कानून लागू करे। वे सरकार या चीनी मिलों के साथ कोई टकराव नहीं चाहते लेकिन, किसानों के हितों की रक्षा हर हाल में होनी चाहिए। शिवकुमार ने नारियल का पानी देकर मोडगी और महिला किसान जे. जयश्री का अनशन तुड़वाया।