दक्षिण कन्नड़ जिले में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां सरकारी आपूर्ति की गई गर्भावस्था जांच किट pregnancy test kit के दोषपूर्ण बैच के कारण 13 वर्षीय किशोरी को गलत तरीके से गर्भवती pregnant बताया गया। घटना के बाद परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और मामले की शिकायत की थी। यह है […]
दक्षिण कन्नड़ जिले में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां सरकारी आपूर्ति की गई गर्भावस्था जांच किट pregnancy test kit के दोषपूर्ण बैच के कारण 13 वर्षीय किशोरी को गलत तरीके से गर्भवती pregnant बताया गया। घटना के बाद परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और मामले की शिकायत की थी।
किशोरी गत वर्ष एक जुलाई को बुखार और तेज उल्टी की शिकायत लेकर पंझा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पहुंची थी। वहां दो बार की गई यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट (यूपीटी) रिपोर्ट ‘पॉजिटिव’ बताई गई। इसके बाद उसे आगे की जांच के लिए सुल्लिया तालुक अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, निजी अस्पताल और बाद में सरकारी अस्पताल में हुई जांच में गर्भावस्था की पुष्टि नहीं हुई।
किशोरी के पिता ने मामले की शिकायत कर्नाटक राज्य मानवाधिकार आयोग (केएसएचआरसी) के समक्ष की। शिकायत के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने जांच की और बुधवार को केएसएचआरसी को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रारंभिक टेस्ट दो बार पॉजिटिव आया, लेकिन चिकित्सकों को जानकारी सार्वजनिक करने से पहले गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए थी और पुष्टि के लिए स्कैनिंग रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए था।
जांच के आधार पर पंझा पीएचसी के प्रशासनिक चिकित्सा अधिकारी को भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने का निर्देश देते हुए चेतावनी नोटिस जारी किया गया है।
जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. एच.आर. थिम्मैया ने कहा कि एक विशेष बैच की गर्भावस्था जांच किट में खराबी की शिकायतें मिली थीं। विसंगतियां सामने आने पर अतिरिक्त किट स्थानीय स्तर पर खरीदकर पुष्टि परीक्षण कराया गया।
किशोरी के माता-पिता का आरोप है कि पीएचसी में जानकारी सार्वजनिक होने से समुदाय में बात फैल गई, जिससे परिवार को सामाजिक बदनामी और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा।