
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (Image Source - Social Media)
कर्नाटक की चीफ सेक्रेटरी शालिनी रजनीश की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) एक्टिविस्ट स्नेहमयी कृष्णा ने गुरुवार को शालिनी के खिलाफ रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में शिकायत दर्ज कराई है।
अपनी शिकायत में, स्नेहमयी ने मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (मुदा) के पूर्व कमिश्नर डीबी नटेश पर प्रमोशन दिलाने के लिए करोड़ों रुपये देने का आरोप लगाया है।
स्नेहमयी ने आरोप लगाया कि नटेश पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप होने के बावजूद, उनका प्रमोशन कराने के लिए चीफ सेक्रेटरी से जुड़े लोगों को 1.60 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर दिए गए।
शिकायत में, स्नेहमयी ने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को एक टोयोटा इटियोस कार में पांच बैग में करोड़ों रुपये मैसूर ले जाई गई। उन्होंने दावा किया कि गाड़ी में 9 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश था। 1.60 करोड़ रुपये वाले बैग में से एक को राज्य के चीफ सेक्रेटरी से जुड़े एक व्यक्ति को दिया गया था।
एक्टिविस्ट ने यह भी आरोप लगाया कि कथित पेमेंट के बाद 13 फरवरी को नतेश के प्रमोशन ऑर्डर जारी किए गए थे। शिकायत में बताई गई गाड़ी कथित तौर पर कर्नाटक स्टेट खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट में रजिस्टर्ड है।
स्नेहमयी कृष्णा ने आरोप लगाया कि नतेश अभी कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं। स्नेहमयी कृष्णा कथित मुदा साइट अलॉटमेंट स्कैम में भी शिकायतकर्ता हैं।
इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है। एक्टिविस्ट ने अपनी शिकायत के साथ गाड़ी की तस्वीरें भी जमा की हैं। उन्होंने ED और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से कथित फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की डिटेल्ड जांच करने की अपील की है।
इसके अलावा, आरटीआई एक्टिविस्ट ने अधिकारियों से नटेश, चीफ सेक्रेटरी शालिनी रजनीश और कथित तौर पर शामिल दूसरे लोगों के मोबाइल टावर लोकेशन डेटा व कॉल रिकॉर्ड हासिल करने की रिक्वेस्ट की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की भी मांग की है।
फिलहाल शिकायत में नामजद अधिकारियों की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। इस मामले से राज्य में बड़ा विवाद खड़ा होने की संभावना है। मुदा के पुराने कर्मचारियों और आलोचकों ने राज्य सरकार पर नटेश को बचाने का आरोप लगाया, उन्हें नौकरी से निकालने की मांग की और पूछा कि आरोपों के बीच उन्हें सस्पेंड क्यों नहीं किया गया।
उधर, ईडी ने नटेश के घर पर रेड मारी, उनसे पूछताछ की और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में अक्टूबर 2024 में उन्हें कस्टडी में ले लिया।
नटेश ने ED की तलाशी और उनके बयानों की रिकॉर्डिंग की कानूनी वैधता को चुनौती देने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कहा गया था कि जांच उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन करती है और उनके पास कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है।
Published on:
19 Feb 2026 06:12 pm
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