डॉ. कस्तूरीरंगन ने कहा कि पिछली शिक्षा नीति के 36 साल बाद, भारत और दुनिया में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक माहौल में काफी बदलाव आया है और देश को अपने मूल्यों और लोकाचार से जुड़े रहते हुए 21वीं सदी की शिक्षा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के अनुरूप एक शैक्षिक प्रणाली की आवश्यकता है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति समिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. कस्तूरीरंगन ने शनिवार को कहा कि नई शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 में जमीनी स्तर से हितधारकों को शामिल करते हुए एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और उनकी प्रतिक्रिया को अंतिम दस्तावेज में शामिल किया गया।
मैसूरु में सेंट फिलोमेना कॉलेज के दीक्षांत समारोह को संबोधित करे रहे डॉ. कस्तूरीरंगन ने कहा कि पिछली शिक्षा नीति के 36 साल बाद, भारत और दुनिया में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक माहौल में काफी बदलाव आया है और देश को अपने मूल्यों और लोकाचार से जुड़े रहते हुए 21वीं सदी की शिक्षा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के अनुरूप एक शैक्षिक प्रणाली की आवश्यकता है। एनइपी परामर्श की सीमा और व्यापकता के मामले में अद्वितीय था।
एनइपी 2015 में एक परामर्शी प्रक्रिया के रूप में शुरू हुई। इसके बाद टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नीति निर्माण किया। जनता की प्रतिक्रियाओं को देखते हुए, हमारी समिति ने 300 से अधिक संस्थानों, व्यक्तियों और समूहों के साथ अतिरिक्त परामर्श के साथ पूरी नीति पर दोबारा गौर किया। इन व्यापक परामर्शों और उनके व्यवस्थित समावेश ने यह सुनिश्चित किया है कि हमारे संविधान की संघीय और धर्मनिरपेक्ष प्रकृति एनइपी में प्रतिबिंबित हो।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी नई वैश्विक चुनौतियां उभरी हैं कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव मानव कल्याण के लिए अवसर और चुनौतियां दोनों प्रस्तुत करते हैं। डॉ. कस्तूरीरंगन ने एनइपी अनुशंसित राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के निर्माण का उल्लेख किया और कहा कि इसकी प्राथमिक भूमिका कला और मानविकी, सामाजिक धाराओं में पर्याप्त वित्त पोषण, सलाह और बहु-विषयक अनुसंधान के समर्थन के माध्यम से एक जीवंत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र का पोषण करना होगा। दीक्षांत समारोह में 464 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई।