बैंगलोर

गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर अब सरकारी अधिकार क्षेत्र में

सुप्रीम कोर्ट ने रामचन्द्रपुरम मठ की याचिका ठुकराई
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गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर अब सरकारी अधिकार क्षेत्र में

बेंगलूरु. गोकर्ण स्थित महाबलेश्वर मंदिर को सरकार के कब्जे में सौंपने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश पर स्थगनादेश लगाने की रामचन्द्रपुरम मठ की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया, जिसके बाद उत्तर कन्नड़ जिला प्रशासन ने इस मंदिर को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस देवस्थान को रामचन्द्रपुरम मठ के कब्जे से सरकारी नियंत्रण में सौंपने का आदेश दिया था। इस आदेश को मठ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, शीर्ष न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से मना कर दिया।

जिसके बाद सरकार ने इस देवस्थान को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है। इस तरह 10 सालों के अंतराल के बाद यह मंदिर फिर से सरकारी नियंत्रण में आ गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गत 10 अगस्त को सुनाए फैसले में इस मंदिर को सरकारी नियंत्रण से रामचन्द्रपुरम मठ को सुपुर्द करने के बारे में राज्य सरकार द्वारा 2012 में जारी आदेश को रद्द कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बुधवार को जिलाधिकारी एस.एस. नकुल ने इस मठ का प्रभार रामचन्द्रपुरम मठ से लेकर जिला प्रशासन को सौंप दिया। उन्होंने देवस्थान विभाग के निर्देशानुसार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की और एच. हालप्पा को मंदिर का प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर प्रभार सौंपा। इस मौके पर अतिरिक्त जिलाधिकारी सुरेश इट्नाल, कुमटा की उपखंड अधिकारी के. लक्ष्मी प्रिया भी उपस्थित थीं।


डायटिंग के नाम पर खानपान से खिलवाड़, बीमारियों को दावत
बेंगलूरु. वजन कम करने के चक्कर में ज्यादातर लोग डायटिंग के नाम पर खानपान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बीमारियों को दावत दे रहे हैं। अनीमिया, उच्च रक्तचाप व रतौंधी (नाइट ब्लाइंडनेस) सहित मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डायटिंग का अर्थ भूखा रहना नहीं, बल्कि संतुलित आहार का सेवन होता है।

डॉ. निशिता कृष्णन बताती हैं कि भूखा रहने से मेटाबॉलिज्म (चयापचय) दर कम हो जाता है। इसके कारण शारीरिक व मानसिक परेशानियां होती हैं। भूखे रहकर वजन घटाने वाले लोगों में आगे चलकर मधुमेह (टाइप-2) व मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। भूखे पेट रहने के कारण नींद में खलल पड़ती है। लोग थके और चिड़चिड़े हो जाते हैं। आवश्यक प्रोटीन की कमी से शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है। पित्ताशय में पथरी होने की संभावना बढ़ जाती है।

Published on:
20 Sept 2018 08:16 pm
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