
बेंगलूरु. संपत्ति कर बढ़ाने के बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के प्रस्ताव का आम नागरिकों ने विरोध शुरू कर दिया है। बीबीएमपी ने आवासीय संपत्तियों के लिए 25 फीसदी जबकि वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए 30 प्रतिशत संपत्ति कर बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव किया है।
बीबीएमपी के इस प्रस्ताव के विरोध में संपत्ति मालिकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कई संपत्ति मालिकों का मानना है कि बीबीएमपी उचित सड़कों सहित बुनियादी ढांचा प्रदान करने में विफल रहा है। यहां तक कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या के लिए कोई त्वरित समाधान नहीं है। बीबीएमपी सभी संपत्ति मालिकों से संपत्ति कर वसूलने तक में विफल है, बावजूद इसके एक बार फिर से संपत्ति कर बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव कर दिया है। नागरिकों का कहना है कि संपत्ति कर बढ़ाने का यह प्रस्ताव आम लोगों को परेशान करने के लिए एक और अतार्किक कदम है। बीबीएमपी से शहरवासियों को स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज और फुटपाथ जैसी बुनियादी सुविधाएं सही नहीं मिल रही हैं। बीबीएमपी को चाहिए कि वह अच्छी सड़कों, प्रकाश व्यवस्था, यातायात, जल निकासी जैसी सुविधाओं को उन्नत करे ताकि आम लोगों को वास्तव में महसूस हो उनके टैक्स भुगतान के कारण उन्हें सुविधएं मिल रही हैं। अमूमन पूरे शहर में एक जैसी समस्या है, इसलिए बीबीएमपी को आम नागरिकों पर उच्च कर लगाने का कोई अधिकार नहीं है।
संपत्ति मालिकों से चर्चा करे पालिका
संपत्ति कर बढोत्तरी के प्रस्ताव को सामाजिक कार्यकर्ता और व्यापारी सज्जनराज मेहता ने असामान्य वृद्धि करार देते हुए कहा कि हम इसकी आक्रामक तरीके से निंदा करते हैं। बीबीएमपी को चाहिए कि वह पहले संपत्ति मालिकों से इस विषय पर चर्चा करे। यलहंका निवासी जय कृष्ण ने कहा कि शहर के कई बाहरी हिस्सों में सड़क तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में संपत्ति कर बढोत्तरी का निर्णय कतई तर्कसंगत नहीं हो सकता है क्योंकि नागरिकों को जब सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं तब संपत्ति कर बढोत्तरी का क्या मतलब है?
कर वसूली सुनिश्चित करे बीबीएमपी
शहरी विशेषज्ञों का कहना है कि बीबीएमपी को संपत्ति कर बढोत्तरी के बजाय मौजूदा संपत्ति कर वसूली पर सौ प्रतिशत प्रभावी बनाने पर ध्यान देना चाहिए। बीबीएमपी के दायरे में करीब 19 लाख आवासीय संपत्तियां पंजीकृत हैं। वर्ष 2017-18 में 2600 करोड़ रुपए संपत्ति का लक्ष्य रखा गया लेकिन वर्ष समाप्ति पर 1777 करोड़ रुपए ही आए। इसी प्रकार मौजूदा वर्ष 2018-19 के लिए 3100 करोड़ संपत्ति कर निर्धारण किया गया है लेकिन अक्टूबर महीने तक 1989 करोड़ रुपए ही आ पाए। वर्ष 2016-17 में भी 2300 करोड़ रुपए की तुलना में 1463 करोड रुपए ही आए थे। हर वर्ष बीबीएमपी अपने लक्ष्य से 30 से 40 प्रतिशत पीछे है, इसलिए कर वसूली को सुनिश्चित किया जाए न कि अनावश्यक रूप से ईमानदार संपत्ति कर दाताओं पर बोझ डाला जाए।
राजस्व बढ़ाने के नए उपायों पर नजर
हाई कोर्ट की फटकार के बाद बीबीएमपी ने अपनी विज्ञापन नीति बदली थी और प्लास्टिक होर्डिंग और बैनर से विज्ञापन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया। इस वजह से बीबीएमपी के विज्ञापन राजस्व को भी झटका लगा। अब राजस्व नुकसान की भरपाई करने के लिए बीबीएमपी ने नए विकल्प तलाशने शुरु किए हैं। संपत्ति कर बढ़ोतरी के प्रस्ताव के अतिरिक्त बीबीएमपी ने कर्नाटक नगर निगम अधिनियम, 1976 में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसके तहत मूल भवन का फर्जी ब्योरा देने वाले संपत्ति मालिकों को दोहरा कर लगाने का प्रस्ताव है। अगस्त में बीबीएमपी ने संपत्ति कर पर भूमि परिवहन उपकर लगाने का प्रस्ताव किया था लेकिन इस पर अब तक कोई चर्चा नहीं हुई है। बीबीएमपी ने गैर-कर स्रोतों को बढ़ाने की भी योजना बनाई है, इसमें मनोरंजन-कर लेना और अनधिकृत ऑप्टिकल फाइबर केबल्स इत्यादि के लिए दंड बढ़ाने की योजना शामिल है।
सुविधाएं देने में विफल पालिका पर लगे जुर्माना
कुछ संपत्ति मालिकों का कहना है कि जिस प्रकार देर से संपत्ति कर भुगतान करने पर बीबीएमपी आम नागरिकों पर जुर्माना लगाती है उसी तर्ज पर नागरिक सुविधाएं देने में विफल रहने के लिए बीबीएमपी पर भी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। बीबीएमपी का प्रदर्शन लगातार हर क्षेत्र में दोयम स्तर का रहा है, इसलिए बीबीएमपी को जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करने के लिए दोषी करार देकर उस पर जुर्माना लगाया जाए।