
बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य को बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की विज्ञापन नीति तैयार नहीं होने को लेकर राज्य सरकार की खिंचाई की। यह नीति पिछले साल तैयार होनी थी। अदालत ने सरकार की छुईमुई वाली कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार वार्षिक के बजाय घंटों के आधार पर काम करे।
अदालत ने शहर में फ्लेक्स व बैनरों को हटाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत ने लाइसेंस नवीनीकरण नियम में बदलाव संबंधी पालिका के प्रस्ताव पर साल भर से कार्रवाई नहीं होने को लेकर सरकार से पूछा कि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। अदालत ने मुख्य सचिव को समुचित कार्रवाई करने और शुक्रवार तक शपथ पत्र दायर करने के निर्देश दिए।
सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि नीति का मसौदा तय करने की जिम्मेदारी प्रशाखा (सेक्शन) अधिकारियों की है लेकिन उन्होंने अपना कार्य पूरा नहीं किया है। दो प्रशाखा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 9 अगस्त तक जवाब मांगा गया है।
अदालत ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कैसे सचिवालय के कर्मचारी साल भर तक वरिष्ठ अधिकारियों को संचिकाएं नहीं भेजते हैं। जजों ने मौखिक टिप्पणी की कि क्या यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था की विफलता नहीं है? क्या सचिवों को इसके बारे में पता नहीं है? यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का अपमान है। ऐसा लगता है कि कोई साहब जिम्मेदार नहीं है और सिर्फ प्रशाखा अधिकारी जैसे कर्मचारी ही जिम्मेवार हैं।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी की कि हर चीज के लिए प्रशाखा अधिकारियों को जिम्मेदार ना ठहराएं। इसके लिए सचिवालय स्तर के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। सचिवालय स्तर के अधिकारी भी अपना काम नहीं कर रहे हैं। ये सिलसिला ऐसे ही जारी रहा तो इसके लिए मुख्य सचिव भी जिम्मेदार माने जाएंगे। अदालत ने पिछले सप्ताह सरकार से पूछा था कि साल भर से लाइसेंस नवीनीकरण के नियमों में बदलाव को मंजूरी क्यों नहीं दी जा रही है। इसके कारण शहर में कई पुराने विज्ञापन होर्डिंग लगे हुए हैं और पालिका उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रही है।
सरकारी वकील ने पिछले सप्ताह बैनर-फ्लेक्स हटाने के दौरान पालिका कर्मचारियों पर हुए हमले के बारे में जांच प्रतिवेदन की जानकारी भी अदालत को दी। जब अदालत ने इस मामले में प्रगति के बारे में पूछा तो महाधिवक्ता उदय होला ने कहा कि इस मामले में अब तक सात लोग गिरफ्तार किए गए हैं और हाई ग्राउंड थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मुख्य न्यायाधीश दिनेश माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पालिका को शहर में अवैध फ्लेक्स, बैनर, होर्डिंग हटाने की कार्रवाई जारी रखने का निर्देश देते हुए कहा कि होर्डिंग और बैनर शहर के सौंदर्य को खराब कर रहे हैं। इसके पालिका को यथाशीघ्र अपनी विज्ञापन नीति बनानी चाहिए। पीठ ने पालिका और सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर आनेवाले दिनों में प्रतिबंध संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय नहीं किए जाते हैं तो इसके लिए न्यायालय राज्य सरकार के मुख्य सचिव को ही जिम्मेदार ठहराएगा। अदालत ने कहा कि अदालत इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई करने के लिए तैयार है।