2004 से 2007 के बीच 14 प्रजातियों के 91 स्तनधारी, 18 प्रजातियों के 75 पक्षी और 16 प्रजातियों के 56 सरीसृप तेज गति से चलने वाले वाहनों की चपेट में आकर सड़क पर मारे गए थे। यह संख्या उसी अवधि में अवैध शिकार से कहीं अधिक थी।
- रात्रि यातायात प्रतिबंध के बाद 90 फीसदी घटे सड़क पर मौत के मामले
बेंगलूरु.
यूनाइटेड कंजर्वेशन मूवमेंट United Conservation Movement के अनुसार बंडीपुर राष्ट्रीय उद्यान Bandipur National Park के मध्य से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 766 रात्रि यातायात प्रतिबंध Night Travel Ban से पहले वन्यजीवों के लिए कब्रिस्तान Cemetery for wildlife था। 2004 से 2007 के बीच 14 प्रजातियों के 91 स्तनधारी, 18 प्रजातियों के 75 पक्षी और 16 प्रजातियों के 56 सरीसृप तेज गति से चलने वाले वाहनों की चपेट में आकर सड़क पर मारे गए थे। यह संख्या उसी अवधि में अवैध शिकार से कहीं अधिक थी। रात्रि यातायात प्रतिबंध के बाद, 2022 और 2024 के बीच यह संख्या उल्लेखनीय रूप से घटकर 9 सड़क दुर्घटनाओं तक रह गई है।
इन दुर्घटनाओं में 90 फीसदी की उल्लेखनीय कमी आई, जो समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण में रात्रि यातायात प्रतिबंध की प्रभावशीलता के बारे में बहुत कुछ कहती है। आदर्श रूप से इस उदाहरण का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि पूरे कर्नाटक और पूरे देश में सभी वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक यातायात प्रतिबंधित रहे।
हाथी, बाघ, तेंदुए, हिरण, ढोल, सिवेट बिल्लियां, मुख्य वन्यजीव आवास में लापरवाही से वाहन चलाने के शिकार हुए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 766 पर एक ट्रक ने एक गर्भवती हथिनी को टक्कर मार दी थी। उसकी मौत हो गई थी।
बंडीपुर के मुख्य भाग से होकर रात में होने वाला यातायात नंजनगुड और गुंडलूपेट के जंगल के बाहरी तालुकों में मानव-पशु संघर्ष को बढ़ावा देगा। कर्नाटक के किसान इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से जंगली हाथियों और जंगली बाघों के सुरक्षित मार्ग के लिए छोड़े गए अछूते क्षेत्र की वजह से फसल उगाने में सक्षम हैं। इस अछूते क्षेत्र ने यह सुनिश्चित किया है कि जुड़े हुए पशु गलियारों का विघटन कम हो और इस क्षेत्र में मानव-पशु संघर्ष कम हो।