बैंगलोर

वर्चुअल ऑटोप्सी से अब पोस्टमॉर्टम में नहीं होगी चीर फाड़

विक्टोरिया यह सुविधा वाला दक्षिण भारत का पहला अस्पताल होगा। शहर का सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज अस्पताल यह सुविधा देने वाला दक्षिण भारत का एक मात्र निजी अस्पताल है। वर्तमान में नई दिल्ली में एम्स और मेघालय में उत्तर पूर्वी इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान संस्थान वरटोप्सी करते हैं।

2 min read
Dec 16, 2024

-विक्टोरिया अस्पताल होगा इस सुविधा लैस दक्षिण का पहला अस्पताल

-डिजिटल एक्सरे, 3डी, एमआरआइ, सिटी स्कैन से मिनटों में परिणाम

- निखिल कुमार

Bengaluru का विक्टोरिया अस्पताल वर्चुअल ऑटोप्सी Virtual Autopsy  या वरटोप्सी (बिना चीर फाड़ किए) की तैयारी में है। हत्या और आत्महत्या Murder and suicide  के मामलों में भी वरटोप्सी संभव होगी। डिजिटल एक्सरे, 3डी, एमआरआइ, सिटी स्कैन Digital X-Ray, 3D, MRI, CT Scan  से मिनटों में परिणाम आएंगे। परंपरागत शव परीक्षण में तीन से छह घंटे लगते हैं।

विक्टोरिया यह सुविधा वाला दक्षिण भारत का पहला अस्पताल होगा। शहर का सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज अस्पताल यह सुविधा देने वाला दक्षिण भारत का एक मात्र निजी अस्पताल है। वर्तमान में नई दिल्ली में एम्स और मेघालय में उत्तर पूर्वी इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान संस्थान वरटोप्सी करते हैं।

शोकग्रस्त परिवार के लिए कम दर्दनाक होगी प्रक्रिया

धार्मिक मान्यताओं के कारण कई लोग शरीर में चीरे लगाने का विरोध करते हैं। हालांकि, चिकित्सकों को कानून के अनुसार ऑटोप्सी करनी पड़ती है। यह तकनीक मृतकों के परिवारों के लिए प्रक्रिया को कम दर्दनाक बनाएगी। इसके अलावा, वरटोप्सी से शोध में मदद मिलेगी और चिकित्सक भी इसके पक्ष में हैं।

3000 से ज्यादा पोस्टमॉर्टम

विक्टोरिया अस्पताल के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने के लिए उत्सुक है। विक्टोरिया अस्पताल में हर वर्ष 3,000 से ज्यादा पोस्टमॉर्टम Postmortem किए जाते हैं। वर्चुअल ऑटोप्सी से शवों की जांच तेजी से करने में मदद मिलेगी।

ऐसे में विस्तृत जांच की जरूरत नहीं

शुरुआती चरण में वर्चुअल ऑटोप्सी का इस्तेमाल सडक़ दुर्घटना Road Accident  और दुर्घटनावश गिरने के मामलों में किया जाएगा क्योंकि इनमें आमतौर पर हड्डियों का फ्रैक्चर होता है। सडक़ दुर्घटना के ज्यादातर मामलों में, लोग चोटों के कारण दम तोडऩे से पहले ही उपचाराधीन होते हैं। ऐसे मामलों में, आम तौर पर कोई गड़बड़ी नहीं होती। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जरूरत नहीं पड़ती है।

हत्या, आत्महत्या के केसेस में भी संभव

इसके विपरीत हत्या, आत्महत्या और दहेज हत्या के मामलों में पारंपरिक शव परीक्षण विधियों की आवश्यकता होती है। हालांकि, तकनीक में सुधार हुआ है और वर्चुअल शव परीक्षण में सटीकता है, इसलिए हम इसे हत्या और आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए भी अपना सकते हैं।

छोटी चोट, ब्लड क्लॉट से लेकर मामूली फ्रैक्चर तक...

वर्चुअल ऑटोप्सी एक रेडियोलॉजिकल प्रक्रिया है। इसमें मृत शरीर को सीटी स्कैन मशीन में रखा जाता है। शव की हजारों तस्वीरें ली जाती हैं और फिर फॉरेंसिक विशेषज्ञ forensic expert  इनका परीक्षण करते हैं। शरीर के विभिन्न अंगों की स्थिति और मौत की वजह का पता लगाते हैं। यह ऑटोप्सी स्कैनिंग और इमेजिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित होती है। विभिन्न ऊतकों और शरीर के अंदरूनी अंगों की विस्तृत जांच की जाती है। शरीर में लगी किसी छोटी सी चोट से लेकर मामूली फ्रैक्चर और ब्लड क्लॉट तक का पता चल जाता है।

Published on:
16 Dec 2024 07:26 pm
Also Read
View All

अगली खबर