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श्रीलंका के न्यायाधीश ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गूगल के खिलाफ दाखिल की याचिका, क्या है मामला?

श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश अहमद नवाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गूगल इंडिया के खिलाफ याचिका दाखिल की है। श्रीलंका के न्यायाधीश की याचिका पर हाईकोर्ट ने गूगल इंडिया को नोटिस जारी किया है। आखिर क्यों दूसरे देश के न्यायाधीश को कर्नाटक हाईकोर्ट में अपील करने पड़ी, आइए जानते हैं पूरा मामला...

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बैंगलोर

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Shaitan Prajapat

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Vinay Shakya

Mar 05, 2026

Karnataka High Court

Karnataka High Court (File Photo)

Srilankan Judge Files Petition Against Google: गूगल इंडिया के खिलाफ श्रीलंका के मौजूदा न्यायाधीश अहमद नवाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। जस्टिस अहमद नवाज की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने गूगल इंडिया को नोटिस जारी किया है। जस्टिस अहमद नवाज की याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम ने केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गूगल इंडिया को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 'कोलंबो टेलीग्राफ' और 'लंका न्यूज' वेबसाइटों को E-mail के माध्यम से व्यक्तिगत नोटिस भेजने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट इस ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है।

श्रीलंका के न्यायाधीश ने क्यों दाखिल की याचिका?

श्रीलंका के मौजूदा न्यायाधीश अहमद नवाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके गूगल पर मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग की है। इसके पहले मानहानिकारक सामग्री हटाने के लिए अहमद नवाज ने गूगल को कानूनी नोटिस भेजा था। कानूनी नोटिस के बाद भी गूगल ने आपत्तिजनक सामग्री प्लेटफार्म से नहीं हटाई। इसके बाद श्रीलंका के न्यायाधीश ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके मानहानिकारक सामग्री हटवाने की गुहार लगाई है। अहमद नवाज का कहना है कि गूगल इंडिया ने उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री और समाचार रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसी रिपोर्ट के यूआरएल और कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने के लिए न्यायाधीश अहमद नवाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। न्यायमूर्ति नवाज ने कहा कि 2015 और 2020 में प्रकाशित मानहानिकारक लेख श्रीलंका की सीमाओं से बहुत दूर तक फैल गए थे और एक न्यायविद के रूप में उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंचाई गई थी।

श्रीलंका के न्यायाधीश ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति नवाज ने दावा किया कि गूगल पर प्रकाशित रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए कथित आरोप निराधार हैं, जो उनकी कई वर्षों के समर्पण और कार्यशैली से अर्जित की गई वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की चुनौती देते हैं। इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि विचाराधीन लेख 'प्रतिष्ठा की हत्या' उनके चरित्र की हत्या से कम नहीं हैं। श्रीलंका के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और एक सुप्रसिद्ध शिक्षाविद के रूप में उन्होंने जो गरिमा सही मायने में अर्जित की है, उससे उन्हें वंचित करने का एक सुनियोजित प्रयास है।
गूगल पर प्रकाशित लेखों का उद्देश्य न्यायमूर्ति नवाज की प्रतिष्ठा को धूमिल करना है। उन पर एक ऐसे अपराध का आरोप लगाना है, जो उन्होंने न तो किया है और न ही कभी करेंगे। इस तरह के निराधार आरोप व्यक्तिगत ईमानदारी और पेशेवर प्रतिष्ठा पर खुला हमला हैं, जो बिना किसी सबूत या सच्चाई के लगाए गए हैं। याचिका में मांग की गई थी कि मानहानिकारक पोस्ट से जुड़े यूआरएल को तत्काल हटा दिया जाए, ताकि उनके नाम, करियर और प्रतिष्ठा को हो रहे अपूरणीय नुकसान को रोका जा सके।

दूसरे देश के न्यायाधीश ने कर्नाटक हाईकोर्ट में क्यों लगाई गुहार?

न्यायमूर्ति नवाज ने गूगल पर मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। न्यायमूर्ति का कहना है कि मानहानि ऑनलाइन हुई है और गूगल का भारतीय मुख्यालय बेंगलुरु में है। इसलिए उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। न्यायमूर्ति नवाज ने यह भी बताया कि उन्होंने आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए गूगल को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बावजूद गूगल ने आपत्तिजनक सामग्री नहीं हटाई। इसके बाद न्यायमूर्ति नवाज ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। नवाज ने दलील दी कि वह स्वयं जज होने के कारण श्रीलंका में मामला दर्ज नहीं कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया है।