
Telangana High Court
Court Big Decision on Property Deed: तेलंगाना हाईकोर्ट ने प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद पर अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने दादा की अपील पर पोते को सौंपी गई प्रापर्ट्री डीड को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह विवाद हैदरावाद के कोटापेट इलाके में 247 वर्ग गज के भूखंड पर बने घर से संबंधित था। यह उपहार विलेख (प्रॉपट्री डीड) साल 2018 में रजिस्टर किया गया था। यह प्रॉपट्री 40 वर्षीय शख्स को उसके दादा ने गिफ्ट की थी।
90 वर्षीय दादा ने पोते पर लापरवाही औरे बेरुखी का आरोप लगाते हुए प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए कोर्ट में गुहार लगाई थी। दादा की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उपहार विलेख रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता, वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के भरण-पोषण एवं कल्याण विभाग के आयुक्त के पास माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण कल्याण अधिनियम 2007 के तहत दूसरी अपील पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।
दादा की अपील का निपटारा करते हुए चीफ जस्टिस अपारेश कुमार सिंह और न्यामूर्ति जीएम मोहिउद्दीन की पीठ ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा- प्रॉपर्ट्री डीड रद्द करने को लेकर की जाने वाली कार्यवाही वैधानिक अधिकार के बिना थी और इसलिए शून्य थी। दादा ने प्रॉपर्टी डीड पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इसे उनकी स्वेछा से नहीं किया गया है और पोते ने इसे संदिग्ध परिस्थितियों में प्राप्त किया है। मामले की जांच में कलेक्टर ने पाया कि यह विलेख विधिवत पंजीकृत था और ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था, जिसके आधार पर यह साबित हो सके कि दादा दबाव में था या लेन-देन की प्रकृति को समझने में असमर्थ था।
प्रॉपर्टी विवाद को लेकर कलेक्टर ने कहा कि एक बार दान विलेख निष्पादित, स्वीकृत और पंजीकृत हो जाने के बाद इसे अमान्य करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिलता, तब तक यह कानूनी रूप से वैध रहता है। दरअसल, इस फैसले से नाराज दादा ने पुनर्विचार की अपील की थी। इस अपील को कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
प्रॉपर्टी विलेख (Property Deed) महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जो अचल संपत्ति (जमीन, मकान, फ्लैट) के स्वामित्व को एक व्यक्ति (विक्रेता/दाता) से दूसरे व्यक्ति (खरीदार/प्राप्तकर्ता) को हस्तांतरित करता है। यह स्वामित्व का सबसे प्रमुख प्रमाण होता है, जो बिक्री, उपहार, या वसीयत के समय हस्ताक्षरित होकर रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड कराया जाता है, जिससे खरीदार के पास मालिकाना हक सुरक्षित हो जाता है। प्रॉपर्टी विलेख संपत्ति से जुड़े कानूनी विवादों से बचाता है, धोखे से सुरक्षा करता है और बैंक ऋण (Loan) लेने के लिए आवश्यक है। इसका रजिस्ट्रेशन उप-पंजीयक (Sub-Registrar) के कार्यालय में रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर यह कानूनी रूप से मान्य नहीं होता है।
Updated on:
05 Mar 2026 06:06 pm
Published on:
05 Mar 2026 06:05 pm
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