
bihar boy shubham kumar
विदेश यात्रा को अक्सर रईसी, धाराप्रवाह अंग्रेजी और एक खास शहरी ठसक से जोड़ा जाता है। लेकिन बिहार के एक लाल शुभम कुमार ने यह मिथक तोड़ दिया है। मुंगेर और भागलपुर के बीच बसे एक छोटे से गांव की गलियों से निकला यह लड़का आज लगभग पूरी दुनिया की यात्रा कर चुका है। उनके पास न बड़ी पूंजी थी न अच्छी अंग्रेजी और न ही कोई शहरी ठाठ, बस दुनिया को अपनी आंखों से देखने की जिद थी। सरकारी स्कूल के शिक्षक के बेटे शुभम ने 17 साल की उम्र में देश-दुनिया घूमने का सफर शुरू किया और उसका दावा है कि वह 24 की उम्र तक दुनिया के 197 संप्रभु देशों की धरती पर कदम रख चुका है।
शुभम का कहना है कि सपने पूरे करने के लिए जेब नहीं, जुनून चाहिए। शुभम ने एक समय अपने घर पर कहा था कि वह दिल्ली जाकर आइएएस की तैयारी करेगा मगर दुनिया की सड़कों पर इम्तिहान देने निकल पड़ा। साल 2018 में लेह-लद्दाख की यात्रा शुरुआत थी जबकि पहला अंतरराष्ट्रीय सफर नेपाल का था। लगातार यात्राओं के चलते अब तक शुभम के छह पासपोर्ट भर चुके हैं। कई बार वीजा रिजेक्ट हुआ, कड़ी पूछताछ झेली लेकिन शुभम का घूमने का जुनून कम नहीं हुआ।
शुभम बताता है कि एक बार इक्वाडोर में पासपोर्ट में स्टैम्प के लिए खाली पन्ना न बचने पर लगभग डिपोर्ट होने की नौबत आ गई थी। ऐसी ही एक अन्य ट्रिप में गैबॉन में जासूस समझकर उसे हिरासत में ले लिया गया था, वहीं मोजाम्बिक में वह दंगों के बीच फंस गया था। हर चुनौती ने उसे और मजबूत बनाया। वह महंगे होटलों की जगह हॉस्टल में रुका, कई बार एक वक्त खाकर पैसे बचाए ताकि अगला वीजा मिल सके। शुभव हिचहाइकिंग, वॉलंटियरी और छोटे-मोटे कामों से पैसे जुटाता है जिससे वह अपने घूमने के शौक को पूरा कर सके।
अब शुभम एक सफल ट्रैवल व्लॉगर बन गया हैं। हैं। यूट्यूब पर 32 लाख से ज्यादा लोग उनके साथ जुड़े हैं, इंस्टाग्राम पर भी लाखों फॉलोअर्स हैं। इससे कमाई भी होने लगी है। अपने ट्रैवल ब्लॉग में वह गांवों, स्थानीय बाजारों और आम लोगों के घरों का सफर करवाते हुए भाषा की दीवार को मुस्कान व इशारों से तोड़ता दिखता है।
Updated on:
05 Mar 2026 05:14 pm
Published on:
05 Mar 2026 04:28 pm
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