
अमेरिका के हमले का शिकार ईरानी जंगी जहाज। (फोटो: AI)
US Navy Submarine : भारत के विशाखापत्तनम में 'मिलन-2026' (Milan 2026) नौसैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने आए ईरानी नौसैनिकों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि यह उनका आखिरी सफर साबित होगा। भारत की सड़कों पर सेल्फी लेते, पर्यटन स्थलों का सैर-सपाटा करते और जमकर शॉपिंग करते इन जवानों की तस्वीरें कुछ ही दिन पहले तक खुशियों से भरी थीं। लेकिन, जैसे ही उनका सबसे आधुनिक युद्धपोत 'आईआरआईएस देना' ( Iran Warship IRIS Dena) भारत से अपने देश ईरान के लिए रवाना हुआ, हिंद महासागर में खौफनाक मौत उनका इंतजार कर रही थी। एक अमेरिकी पनडुब्बी (Submarine) ने इस जहाज पर ऐसा अचूक टॉरपीडो दागा (US Torpedo Attack) कि यह पोत पल भर में समंदर की अथाह गहराइयों में समा गया। इस विनाशकारी और अचानक हुए हमले में 87 ईरानी नौसैनिकों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि 32 जवानों को रेस्क्यू कर लिया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 4 मार्च 2026 की अलसुबह श्रीलंका के दक्षिणी तट से करीब 40 समुद्री मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में यह खौफनाक घटना हुई। अमेरिकी नौसेना की एक हमलावर पनडुब्बी ने 'मार्क 48' भारी टॉरपीडो का इस्तेमाल करते हुए ईरानी पोत पर सटीक निशाना लगाया। विस्फोट की तीव्रता इतनी भयंकर थी कि जहाज का पिछला हिस्सा पूरी तरह से उड़ गया। इस विनाशकारी और अचानक हुए हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिकों की दर्दनाक मौत हो गई है। घटना के तुरंत बाद श्रीलंका की नौसेना ने आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए 32 नौसैनिकों की जान बचा ली, जिनका स्थानीय अस्पतालों में गंभीर हालत में इलाज चल रहा है। पोत पर सवार कई जवान अब भी लापता हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला ऐतिहासिक और दुर्लभ मौका है जब अमेरिका ने टॉरपीडो का इस्तेमाल कर दुश्मन के किसी युद्धपोत को इस तरह समंदर में डुबोया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस विनाशकारी हमले की पुष्टि करते हुए इसे 'शांत मौत' (Quiet death) करार दिया। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि यह हमला ईरान के खिलाफ चल रहे मौजूदा युद्ध और उसकी सैन्य ताकत को नेस्तनाबूद करने के बड़े अभियान का एक अहम हिस्सा है।
ईरानी युद्धपोत के इस तरह तबाह होने पर वैश्विक स्तर पर भारी कूटनीतिक उबाल आ गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी चेतावनी के हुए इस हमले को घोर 'अत्याचार' और कायरतापूर्ण बताया है। ईरान ने अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि उसे इस उकसावे भरे कदम के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा अधिकारियों (पेंटागन) का साफ कहना है कि युद्ध में जीतने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा और उनके निशाने पर ईरान की पूरी नौसेना है।
इस विध्वंसक हमले के बाद पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। श्रीलंका की वायुसेना और नौसेना का बचाव दल अभी भी समुद्र में फैले तेल के रिसाव और मलबे के बीच लापता ईरानी सैनिकों की तलाश में जुटा है। दूसरी तरफ, अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर हवाई हमले और तेज कर दिए हैं। इस घटना के बाद पश्चिमी एशिया से लेकर दक्षिण एशिया तक युद्ध फैलने की प्रबल आशंकाएं बन गई हैं।
इस पूरी घटना का सबसे बड़ा और अहम पहलू भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति से जुड़ा है। तबाह हुआ ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारतीय नौसेना के मेहमान के तौर पर 'मिलन 2026' अभ्यास का हिस्सा था। भारत के इतने करीब और भारत से ही लौट रहे जहाज पर अमेरिकी हमले ने रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर (जो भारत के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है) अब महाशक्तियों के सीधे और हिंसक टकराव का अखाड़ा बन चुका है, जो भविष्य में भारत के लिए बड़ी रणनीतिक और व्यापारिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
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Published on:
05 Mar 2026 03:07 pm
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