
Nitish Kumar(Image: X-Nitish Kumar)
Transition : बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर (Bihar politics news) सामने आ रही है। सरकारी सूत्रों और दिल्ली-बिहार की प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह साफ हो गया है कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर चुके नीतीश कुमार (Nitish Kumar Rajya Sabha) अभी कम से कम एक महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। तुरंत इस्तीफे की अटकलों पर विराम लगाते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि सत्ता का यह ऐतिहासिक हस्तांतरण (Transition of Power) बेहद सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार तुरंत मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ रहे हैं। अप्रेल के दूसरे सप्ताह (लगभग 10 अप्रेल) से राज्यसभा का नया कार्यकाल शुरू होने जा रहा है, जब मौजूदा सदस्य रिटायर होंगे। ऐसे में यह तय किया गया है कि अगले एक महीने तक नीतीश कुमार ही राज्य की कमान संभालेंगे। यह अवधि इसलिए भी तय की गई है ताकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA government Bihar) के भीतर नए नेतृत्व के चुनाव और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया बिना किसी जल्दबाजी या राजनीतिक अस्थिरता के पूरी की जा सके।
दिल्ली और पटना के राजनीतिक गलियारों और मीडिया चैनल्स के हवाले से कई महत्वपूर्ण बातें सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस एक महीने के दौरान बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व (जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा शामिल हैं) बिहार के नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल करेगा। चूंकि हालिया चुनावों में एनडीए को भारी बहुमत मिला है, ऐसे में दिल्ली के सियासी हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि अब बिहार की कमान पहली बार पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के किसी नेता के हाथ में जाने वाली है।
पटना के स्थानीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एक महीने में जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी अपने संगठन में कुछ बड़े बदलाव करेगी। जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच नीतीश कुमार के राज्य की प्रत्यक्ष राजनीति से दूर जाने को लेकर हलचल है। साथ ही, स्थानीय मीडिया में यह खबर भी सुर्खियां बटोर रही है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार इस दौरान पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी संभाल सकते हैं या उन्हें राज्य सरकार में कोई बड़ा पद दिया जा सकता है।
नीतीश कुमार ने स्वयं सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने इस कदम की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा कि उनके राजनीतिक जीवन की यह शुरूआती इच्छा थी कि वह बिहार विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) के साथ-साथ संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के चारों सदनों के सदस्य बनें। राज्यसभा जाते ही उनका यह सफर पूरा हो जाएगा। उन्होंने पिछले दो दशकों से उन पर अटूट विश्वास जताने के लिए बिहार की जनता का आभार व्यक्त किया।
भले ही नीतीश कुमार दिल्ली कूच कर रहे हों, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बिहार की नई सरकार को उनका पूरा "सहयोग और मार्गदर्शन" मिलता रहेगा। यह एक महीने का समय बिहार के इतिहास का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। इस अवधि में जहां एक तरफ नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में अपना दो दशक लंबा सफर समेटेंगे, वहीं दूसरी ओर राज्य को एक नए मुख्यमंत्री का चेहरा मिलेगा।
Updated on:
05 Mar 2026 06:08 pm
Published on:
05 Mar 2026 04:53 pm
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