बैंगलोर

दो दशकों से लंबित परिधीय रिंग रोड परियोजना होगी क्रियान्वित

तैयारी: भूमि अधिग्रहण लागत कम करने के लिए बनेगा 65 किमी का एलिवेटेड-वे 13000 करोड़ रुपए आएगी लागत
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दो दशकों से लंबित परिधीय रिंग रोड परियोजना होगी क्रियान्वित

बेंगलूरु. करीब दो दशक से लंबित परिधीय रिंग रोड (पीआरआर) परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए बेंगलूरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने एक बार फिर से सक्रियता दिखाई है। साथ ही परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण लागत को कम करने के लिए पीआरआर को एलिवेटेड कोरिडोर में तब्दील किया जाएगा। पीआरआर की परिकल्पना दो दशक से ज्यादा पुरानी है लेकिन भिन्न कारणों से 65 किमी की यह परियोजना पिछले दो दशकों से लंबित है।

बीडीए को भरोसा है कि एलिवेटेड पीआरआर को क्रियान्वित करना आसान है और इसे शीघ्रतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। बीडीए अधिकारियों के अनुसार कई दौर के परामर्श के बाद परियोजना को एलिवेटेड सड़क द्वारा क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया। इस प्रकार भूमि अधिग्रहण लागत पर 40 प्रतिशत की कमी आएगी।

बीडीए के अनुमानों के अनुसार एलिवेटेड निर्माण होने से भूमि अधिग्रहण लागत मूल्य 4000 करोड़ रुपए आ जाएगा जो पहले 9000 करोड़ रुपए अनुमानित था। पहले की योजना के अनुसार परियोजना के लिए 1989 एकड़ भूमि अधिग्रहण की जरुरत थी जिसकी लागत 9000 करोड़ रुपए आने की संभावना थी। हालांकि, निर्माण लागत करीब 9000 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा क्योंकि एलिवेटेड निर्माण में निर्माण लागत ज्यादा होता है।

परिधीय रिंग रोड परियोजना से तुमकूरु रोड और होसूर रोड को बल्लारी रोड तथा ओल्ड मद्रास रोड के रास्ते एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। साथ ही यह नाइस एक्सप्रेस वे से भी जुड़ेगा। माना जा रहा है कि परियोजना की शुरूआत जल्द ही हो जाएगी क्योंकि भूमि अधिग्रहण लागत में अब कमी आ गई है और भूमि अधिग्रहण लागत राज्य सरकार उठा सकती है। उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी इस बात का संकेत दिया है कि दो दशकों से लंबित परियोजना एक बार फिर से से साकार होने की दिशा में है।

बीडीए सूत्रों के अनुसार 13000 करोड़ रुपए की एलिवेटेड पीआरआर परियोजना का वित्त पोषण हाइब्रिड मॉडल पर किया जा सकता है। इसके तहत निजी कंपनियों को परियोजना से जोड़ा जाएगा और बीडीए लागत मूल्य का मामूली हिस्सा ही वहन करेगी। हाइब्रिड मॉडल में निजी कंपनियां 60 प्रतिशत निवेश करेंगी जबकि बीडीए की देखरेख में 40 प्रतिशत निर्माण लागत राज्य सरकार वहन करेगी। बाद में एक निर्धारित अवधि तक निजी कंपनियां टोल टैक्स वसूलेंगी ।

Published on:
31 Aug 2018 08:19 pm