सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी संपत्ति से जुड़े करोड़ों रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के दौरान जब्त की गई संपत्ति को वापस करने से इनकार कर दिया गया था।
बेंगलूरु. सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
इस याचिका में कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी संपत्ति से जुड़े करोड़ों रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच के दौरान जब्त की गई संपत्ति को वापस करने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि जयललिता के निधन के बाद कार्यवाही समाप्त होने का मतलब उन्हें बरी करना नहीं है। इसलिए, उनकी संपत्ति जब्त करने का फैसला बरकरार है, जो उनकी भतीजी जे. दीपा के लिए झटका है, जो संपत्ति वापस लेने की मांग कर रही थीं।
दीपा ने तर्क दिया कि चूंकि शीर्ष अदालत ने 2017 में कार्यवाही समाप्त कर दी थी, इसलिए जयललिता को दोषी नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा और जब्त की गई संपत्तियों पर कानूनी अधिकार पर जोर दिया।
कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, एक विशेष अदालत ने संपत्ति तमिलनाडु सरकार को हस्तांतरित कर दी।