
किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (केएमआइओ) ने देश सहित कर्नाटक में बढ़ते बाल कैंसर के मामलों को लेकर चेताया।
किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (केएमआइओ) ने देश सहित राज्य Karnataka में बढ़ते बाल कैंसर Childhood Cancer के मामलों को लेकर चेताया है। बच्चों में ल्यूकेमिया Leukemia (रक्त कैंसर) Blood Cancer सबसे सामान्य है, जो लडक़ों में लगभग 40 प्रतिशत और लड़कियों में 34 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के ट्यूमर का स्थान आता है। कर्नाटक में वर्ष 2025 में अनुमानित 1,882 नए मामले और 312 मौतें दर्ज होने का अनुमान है, जबकि बेंगलूरु में अकेले लगभग 349 नए मामले सामने आने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार समय पर कैंसर के निदान और जागरूकता से कैंसर के मामलों को रोकने सहित उचित उपचार से हर वर्ष हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
केएमआइओ के निदेशक डॉ. टी. नवीन ने बताया कि क्षेत्रीय कैंसर केंद्र के रूप में केएमआइओ बाल कैंसर उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश में सालाना 25,939 के मुकाबले केएमआइओ में हर वर्ष लगभग 400-500 नए पंजीकरण होते हैं। पिछले वर्ष आउटपेशेंट विभाग में 18,000 मरीज आए थे। बीते वर्ष करीब 590 नए मामले दर्ज किए गए और 12,612 बाह्य रोगी परामर्श (ओपीडी विजिट) हुए। संस्थान में 16 बिस्तरों वाला बाल गहन चिकित्सा कक्ष (पीआइसीयू) और 65 बिस्तरों का ‘कपूर वार्ड’ बच्चों के लिए समर्पित है। यहां ऑटोलॉगस बोन मैरो प्रत्यारोपण कार्यक्रम संचालित है और भविष्य में एलोजेनिक प्रत्यारोपण की योजना है।
डॉ. नवीन ने बताया ने अभिभावकों और देखभालकर्ताओं से अपील की है कि यदि बच्चे में असामान्य गांठ या सूजन, लगातार बुखार, बिना कारण पीलापन, आसानी से चोट या रक्तस्राव, उल्टी के साथ बार-बार सिरदर्द, लंबे समय तक थकान, तेजी से वजन कम होना, आंखों में सफेद चमक (व्हाइट रिफ्लेक्स), लंबे समय तक लिम्फ नोड्स की सूजन या बिना कारण रात में पसीना आने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
- वैश्विक स्तर पर हर वर्ष अनुमानित 2.73 लाख (273,051) बच्चों और किशोरों (0-19 वर्ष) में कैंसर का निदान होता है। यानी प्रतिदिन लगभग 1,000 नए मामले सामने आते हैं।- बाल कैंसर विश्व भर में कुल कैंसर मामलों का लगभग 1.5 प्रतिशत है, लेकिन इसका बोझ निम्न और मध्यम आय वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, में अधिक है।
- ग्लोबोकैन 2022 के अनुसार भारत में हर वर्ष लगभग 35,240 नए बाल कैंसर के मामले दर्ज होते हैं, जो देश में कुल कैंसर मामलों का करीब 2.5 प्रतिशत है।
-शून्य से 19 वर्ष आयु वर्ग में लगभग 16,850 मौतें प्रतिवर्ष होती हैं।
-विकसित देशों में जहां बाल कैंसर की उपचार दर 80 प्रतिशत से अधिक है, वहीं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में बच्चों को देर से पहचान, विशेषज्ञ उपचार तक सीमित पहुंच, उपचार संबंधी जटिलताओं, इलाज अधूरा छोड़ देने और दोबारा बीमारी उभरने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
Published on:
13 Feb 2026 05:48 pm
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