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कोडुगू में पकड़ा गया नागरहोले से भटका बाघ

-छह घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन नागरहोले टाइगर रिजर्व Nagarhole Tiger Reserve के कल्लहल्ला वन क्षेत्र से भटककर बेसगुरु गांव के पास पहुंचा और कई मवेशियों को मारने वाला एक छह वर्षीय नर बाघ Tiger अखिरकार पकड़ा गया। कोडुगू वन मंडल की टीम ने छह घंटे चले विशेष अभियान में उसे सुरक्षित पकड़ा। यह बाघ दक्षिण […]

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-छह घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

नागरहोले टाइगर रिजर्व Nagarhole Tiger Reserve के कल्लहल्ला वन क्षेत्र से भटककर बेसगुरु गांव के पास पहुंचा और कई मवेशियों को मारने वाला एक छह वर्षीय नर बाघ Tiger अखिरकार पकड़ा गया। कोडुगू वन मंडल की टीम ने छह घंटे चले विशेष अभियान में उसे सुरक्षित पकड़ा। यह बाघ दक्षिण कोडुगू के बेसगुरु गांव की सीमा में देखा गया था।

ट्रैंकुलाइज किया

अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद मंगलवार शाम बाघ को ट्रैंकुलाइज किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे पुनर्वास के लिए बन्नेरघट्टा एनिमल रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया। इस पूरे अभियान में 80 से अधिक वनकर्मी, दो प्रशिक्षित हाथी और पशु चिकित्सकों की एक विशेषज्ञ टीम शामिल रही।

बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पहली बार इस तरह के अभियान में तीन थर्मो ड्रोन का उपयोग किया गया। इसके अलावा दो अन्य ड्रोन और 20 से अधिक वॉकी-टॉकी भी तैनात किए गए। ड्रोन सर्विलांस के दौरान बाघ की पहचान होने पर शार्प-शूटर रंजन ने पशु चिकित्सक डॉ. रमेश और डॉ. मुजीब की सहायता से उसे बेहोश किया।

आसान शिकार की तलाश

वीराजपेट के उप वन संरक्षक जगन्नाथ ने बताया कि जनवरी में कैमरा ट्रैप Camera Trap में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जिससे पुष्टि हुई कि वह कल्लहल्ला वन क्षेत्र से भटका है। अभियान के दौरान बाघ के पैर में चोट भी पाई गई। उन्होंने कहा कि संभवत: इसी चोट के कारण बाघ आसान शिकार की तलाश में कोर वन क्षेत्र से बाहर आ गया और मवेशियों पर हमला करने लगा।

अभियान में प्रशिक्षित हाथी भीमा और महेंद्र का उपयोग किया गया, क्योंकि वे बाघ की मौजूदगी से घबराते नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार, जनरेटर से संचालित वॉकी-टॉकी और थर्मो ड्रोन के इस्तेमाल से यह मिशन सफल रहा।