- क्लिनिकल ट्रायल शुरू
- सात मरीज आइसीयू में
बेंगलूरु. प्रदेश में कोविड-19 के गंभीर मरीजों के उपचार में अब कान्वलेसेंट प्लाज्मा थेरेपी (Convalescent plasma therapy) का इस्तमाल होगा लेकिन फिलहाल ऐसा सिर्फ क्लिनिकल ट्रायल (Clinical Trial) के रूप में हो सकेगा।
चिकित्सा शिक्षा और कोविड-19 मामलों के मंत्री डॉ. के. सुधाकर और स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलू ने शनिवार को बेंगलूरु मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अंतर्गत संचालित विक्टोरिया अस्पताल में क्लिनिकल ट्रायल के प्रथम फेज का उद्घाटन किया। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (The Indian Council of Medical Research - आइसीएमआर) ने कुछ दिनों पहले ही कर्नाटक को इसकी इजाजत दी थी। इससे कोविड-19 के गंभीर मरीजों के ठीक होने की उम्मीद बढ़ी है।
एचसीजी अस्पताल (HCG Hospital) के ओरल कैंसर विशेषज्ञ डॉ. विशाल राव (Dr. Vishal Rao) के नेतृत्व में बीएमसीआरआइ और एचसीजी अस्पताल संयुक्त रूप से ट्रायल को अंजाम देंगे। बीएमसीआरआइ की डीन और निदेशक डॉ. सी. आर. जयंती ने कोविड-19 को मात दे चुके मरीजों से प्लाज्मा दान के लिए आगे आने की अपील की है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद होम क्वारंटाइन के दूसरे फेज (14 से 28 दिन) से गुजर रहे लोग प्लाज्मा दान कर सकते हैं।
डॉ. विशाल राव ने बताया कि ठीक हो चुके लोग एचसीजी अस्पताल में प्लाज्मा दान करेंगे। जबकि बीएमसीआरआइ में भर्ती कोविड-19 के गंभीर मरीजों को यह प्लाजमा चढ़ाया जाएगा।
स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव जावेद अ तर ने कहा कि कोरोना से अलावा अन्य बीमारियों से पीडि़त मरीजों का प्लाज्मा नहीं लिया जाएगा। स्वस्थ हो चुके दो से तीन मरीजों के प्लाज्मा से क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो चुका है।
डॉ. सुधाकर ने बताया कि सघन चिकित्सा इकाइ सहित जीवन रक्षक प्रणाली पर पर रखे गए मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग होगा। फिलहाल सात मरीज आइसीयू में भर्ती हैं।