हम ट्रेनों में यात्री भार के बराबर बालू तथा अन्य सामग्री रखकर कर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पेटीबिलिटी (इएमसी) परीक्षण कर रहे हैं, जो अंतिम चरण में है। इसे दो-तीन दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
बेंगलूरु. नम्मा मेट्रो प्रबंधन ने जून से मुसाफिरों के सफर को और सुविधाजनक बनाने की तैयारी कर ली है। अगले माह के आखिर तक चुनिंदा मार्गों पर ६ डिब्बा वाली ट्रेन की सवारी शुरू होने की पूरी संभावना है। बेंगलूरु मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) द्वारा इसके लिए जारी परिचालन परीक्षण अगले कुछ दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद संरक्षा आयुक्त से हरी झंडी के बाद आम यात्रियों के लिए ट्रेन उपलब्ध होगी।
बीएमआरसीएल के प्रबंध निदेशक महेन्द्र जैन ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि तीन के बजाय छह कोच की ट्रेन होने से इंजन के साथ ही पटरियों पर भी भार बढ़ेगा। हम ट्रेनों में यात्री भार के बराबर बालू तथा अन्य सामग्री रखकर कर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पेटीबिलिटी (इएमसी) परीक्षण कर रहे हैं, जो अंतिम चरण में है। इसे दो-तीन दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा ट्रेन को ५०० किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक सुरंगों, एलिवेटेड मार्गों पर दौड़ाकर कोच व यात्रियों से जुड़ी सुरक्षा, सिग्नल प्रणाली, ट्रेन समयांतराल, सॉफ्टवेयर में बदलाव और आपातकालीन निकासी आदि तकनीकी पहलुओं का परीक्षण किया है। जैन ने कहा कि छ: कोच की ट्रेनों का परीक्षण बैयप्पनहल्ली से मैसूरु रोड स्टेशन दरमियान किया गया है। सामान्य परिचालन के लिए अनुमति पत्र प्राप्त करने के लिए मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त (सीएमआरएस) को जून के प्रथम सप्ताह तक आवेदन किया जाएगा। जैन ने कहा कि परिचालन आवेदन करने के बाद और सीएमआरएस अधिकारियों के जांच के बाद छ: कोच वाली मेट्रो का परिचालन जून के अंतिम सप्ताह तक शुरू होने की पूरी उम्मीद है।
महिला यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी
वर्तमान में नम्मा मेट्रो में सबसे अधिक यात्री भार पर्पल लाइन अर्थात बैयप्पनहल्ली से मैसूरु रोड के बीच है। मेट्रो प्रबंधन छह कोच वाली ट्रेन इसी रूट में परिचालित करेगा। जैन ने बताया कि तीन कोच में कुल ९७५ यात्रियों के सफर करने की क्षमता थी।
वहीं छह कोच वाली ट्रेन २००४ यात्रियों का भार वहन करने क्षमता की होंगी।
उन्होंने कहा कि भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) से नम्मा मेट्रो को कोच आपूर्ति की प्रक्रिया अगले माह से शुरू होगी। कोच संख्या बढऩे पर महिला यात्रियों को मेट्रो ट्रेन में प्रवेश के लिए काफी सहूलियत होगी, क्योंकि पहले कोच के दो प्रवेश द्वार महिला यात्रियों के लिए आरक्षित करने के बाद भी पीक ऑवर में कभी-कभी पुरुष यात्री इनसे प्रवेश करते हैं।