
मैसूरु. सिटी स्थानक में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा डॉ. समकित मुनि ने कहा कि जिनका धर्म में मन लगा रहता है और जो धर्म से विमुख नहीं होते वे शक्ति सम्पन्न होते हैं।
मुनि ने श्रावकों से कहा कि स्वयं को धर्म में पारंगत करो। धर्म कला नहीं सीखी तो दुनिया की सीखी हुई सारी कलाएं दुखदायी बनती हैं। विज्ञान ने आदमी को सबकुछ सिखाया, विज्ञान ने इन्सान को आकाश में उडऩा, पानी में मछली समान तैरना भी सिखा दिया।
लेकिन परिवार में कैसे रहना है ये कला न तो विज्ञान ने आदमी को सिखाई और न ही विज्ञान यह कला सिखा सकता है। परिवार में रहने की कला धर्म सिखाता है। इसी कारण से बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी आध्यात्म की शरण लेते हैं।
धर्म में दृढ़ रहने के लिए आंतरिक शक्ति का होना जरूरी है। आंतरिक शरीर कमजोर हो तो बाहरी शरीर चाहे कितना भी बाहुबली जैसा हो फिर भी आदमी कमजोर ही रहता है।
डॉ. समकित मुनि के सान्निध्य में मंगलवार को आचार्य हेमचन्द्र सूरी की जन्म जयंती मनाई जाएगी। संचालन संघ के मंत्री सुशील नंदावत ने किया।