बैंगलोर

जंगल की ‘टॉक’ आवाज ने कराई ‘काली नाइट फ्रॉग’ की खोज

डिप्टी रेंज वन अधिकारी सी. आर. नाइक ने बारिश के दौरान मोबाइल पर मेंढक की आवाज रिकॉर्ड की, जिससे शोध को दिशा मिली। वनकर्मी रमेश बडिगेर ने मेंढकों का पता लगाने और उनके प्रजनन व्यवहार को दर्ज करने में सहायता की।

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Mar 30, 2026
मेंढक की नई प्रजाति न्यक्तिबाट्रैकस काली (काली नाइट फ्रॉग)

- दिखने में समान, लेकिन आनुवंशिक रूप से अलग

- वनकर्मियों और वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता

कर्नाटक Karnataka के काली टाइगर रिजर्व Kali Tiger Reserve में वैज्ञानिकों और वन कर्मियों की संयुक्त टीम ने मेंढक की नई प्रजाति न्यक्तिबाट्रैकस काली (काली नाइट फ्रॉग) Kali Night Frog की खोज की है। यह खोज एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुई है और इसे देश की समृद्ध जैव विविधता में महत्वपूर्ण इजाफा माना जा रहा है। देश में फिलहाल 474 उभयचर प्रजातियां दर्ज हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक क्रिप्टिक स्पीशीज है, जो दिखने में कुंबारा नाइट फ्रॉग जैसी है, लेकिन आनुवंशिक रूप से अलग है। यह प्रजाति पश्चिमी घाट के कैसल रॉक क्षेत्र में पाई गई, जो पहले ज्ञात क्षेत्र से 100 किमी दूर है।

आवाज से खुला राज

मणिपाल प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआइटी), बेंगलूरु में असिस्टेंट प्रोफेसर और इस अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. प्रीति हेब्बार ने बताया कि इस मेंढक Frog की पहचान उसकी खास टॉक जैसी आवाज से हुई, जो लकड़ी काटने की ध्वनि जैसी लगती है। शोध में पाया गया कि इसकी कॉल और डीएनए संरचना अन्य 34 प्रजातियों से अलग है।

वन कर्मियों की अहम भूमिका

इस खोज की खास बात यह रही कि वन विभाग के कर्मचारियों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई। डिप्टी रेंज वन अधिकारी सी. आर. नाइक ने बारिश के दौरान मोबाइल पर मेंढक की आवाज रिकॉर्ड की, जिससे शोध को दिशा मिली। वनकर्मी रमेश बडिगेर ने मेंढकों का पता लगाने और उनके प्रजनन व्यवहार को दर्ज करने में सहायता की।

संरक्षण की बढ़ी जरूरत

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दुनिया में लगभग 40 प्रतिशत उभयचर प्रजातियां विलुप्ति के खतरे में हैं। चूंकि यह मेंढक जलधाराओं पर निर्भर है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए पश्चिमी घाट की नदियों और जंगलों का संरक्षण बेहद जरूरी है।

वैज्ञानिक अनुसंधान में भी योगदान

वन विभाग के फ्रंटलाइन कर्मचारियों ने इस नई प्रजाति की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह उनकी वैज्ञानिक सोच और उत्साह को दर्शाता है। वे संरक्षण और विकास कार्यों के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान में भी योगदान दे रहे हैं। -कुमार पुष्कर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)

Published on:
30 Mar 2026 06:52 pm
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