
बांसवाड़ा. जिले में कोरोना स्प्रेड का प्रभाव दिनोंदिन बढ़ रहा है। हालात यह है कि यहां आठ दिन में 254 नए मरीज आ चुके हैं। इनमें ज्यादातर रक्षा बंधन और इसके बाद मेल-मिलाप में स्वच्छंदता के चलते होना सामने आए हैं, जिससे जिला अस्पताल में जगह की कमी होने लगी है। हालांकि अस्पताल प्रशासन नई गाइड लाइन के अनुरूप लक्षणहीन रोगियों को होम आइसोलेशन करते हुए संतुलन बनाने में जुटा है, लेकिन हाल ही में त्योहारों पर बढ़े जन जमावड़े से कोरोना रोगियों में और इजाफे की आशंका बनी हुई है। ऐसे में अब चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी रोगियों के उपचार के लिए नए बंदोबस्त की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। एमजी अस्पताल के पीएमओ डॉ. अनिल भाटी का कहना है कि रोगियों में और इजाफे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कोविड डेडिकेटेड जिला हॉस्पीटल में 160 बैड हैं, जो पूरे भरने के बाद गाइडलाइन अनुसार जिन रोगियों में किसी तरह के लक्षण नहीं है, उन्हें होम आइसोलेट कर रहे हैं। इसके अलावा ब्लॉक से लाए जा रहे रोगियों कलक्टर और विभाग के उच्चाधिकारियों से चर्चा की है। घाटोल, परतापुर और सज्जनगढ़ क्षेत्र में कोविड केयर सेंटर बनाकर वहां के रोगियों के लिए वहीं उपचार की व्यवस्था करना प्रस्तावित किया है। इनमें असिम्टेमेटिक या माइल्ड सिम्टेमेटिक रोगियों का उपचार मुमकिन है, वहीं गंभीर रोगियों को ही जिला अस्पताल में भेजने को कहा गया है।
70 फीसदी असिम्टेमेटिक पर युवाओं में भी खतरा
इधर, एमजी अस्पताल में उपचार कर रही विशेषज्ञों की टीम का अनुभव भी चौंकाने वाला है। टीम के अनुसार बांसवाड़ा में करीब 70 फीसदी रोगी असिम्टेमेटिक हैं। बावजूद इसके इन दिनों निमोनिया और ऑक्सीजन सेचुरेशन की दिक्कत उम्रदराज ही नहीं, 38 से 42 वर्षीय युवाओं में भी देखी गई है। बुधवार को ही जिला अस्पताल से दो गंभीर रोगियों को उदयपुर भेजना पड़ा। ऐसे में कोरोना को हलके में लेना घातक सिद्ध हो सकता है।
यह कह रहे आठ दिन के आंकड़े
दिन पॉजिटिव
26 अगस्त-27
27 अगस्त- 19
28 अगस्त-23
29 अगस्त-18
30 अगस्त-29
31 अगस्त-42
1 सितंबर-51
2 सितंबर-45
8 दिन - कुल 254