बांसवाड़ा

यहां तीन कमरों में हो रही पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई

Rajasthan

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरमाता का मामला, स्कूल में शिक्षकों की भी कमी

चीखली। सरकार ने हर ग्राम पंचायत में स्कूलों को क्रमोन्नत कर शिक्षा के नाम पर वाहवाही तो बटोर ली, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है। चीखली ब्लॉक की ग्राम पंचायत बोरमाता में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरमाता इसकी बानगी है। यहां क्रमोन्नति तो हो गई, लेकिन न नए कक्षा-कक्ष मिले, न पर्याप्त शिक्षक। नतीजा वर्षो पुराने 3 कमरों में ही पीईईओ स्तर का पूरा स्कूल चल रहा है। संस्थाप्रधान व स्टाफ़ भी एक कक्ष में शामिल बैठने को मजबूर है। स्टाफ के लिए शौचालय भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परेशानी उठानी पड़ रही है।
विद्यालय की नींव वर्ष 1983 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय के रूप में रखी गई। 37 साल बाद 2020 में इसे उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत किया गया। उसी साल ग्राम पंचायत पुनर्गठन में बोरमाता नई पंचायत बनी तो इसे राउमावि का दर्जा भी मिल गया। लेकिन दर्जा बढऩे के साथ सुविधाएं नहीं बढ़ीं। आज भी विद्यालय प्राथमिक के उन्हीं पुराने भवन में संचालित हो रहा है। विभाग के अधिकारियों को समस्या की जानकारी होने के बावजूद सालों से हालात जस के तस हैं।

5 कमरे, 161 बच्चे और शामिल बिठाने की मजबूरी

यहां कक्षा 1 से 12 तक के 161 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। स्कूल में कुल 5 कमरे हैं। 3 कमरों में कक्षा 1-5 के 44, कक्षा 6-8 के 66 और कक्षा 9-12 के 41 बच्चों को शामिल बिठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। एक कमरा कार्यालय के लिए, दूसरा एमडीएम, खेल सामग्री, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें और अन्य सामान के लिए उपयोग में लिया जा रहा हैं। नए कक्षा-कक्षों की स्वीकृति वर्षों से लंबित है। ऐसे में शिक्षकों के लिए एक साथ तीन कक्षाओं को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं।

स्कूल में 13 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सिर्फ 6 पद भरे हैं। 7 पद रिक्त पड़े हैं। इनमें संस्थाप्रधान, चार वरिष्ठ अध्यापक और एक कनिष्ठ सहायक का पद शामिल है। सबसे बड़ी विडंबना यह कि उच्च माध्यमिक स्कूल में शारीरिक शिक्षक का पद ही स्वीकृत नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने क्रमोन्नत करके आंकड़ें तो बढ़ा दिए, लेकिन बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। जब तक भवन और स्टाफ की समस्या हल नहीं होगी, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना पूरा नहीं हो पाएगा।

इनका कहना है

मैंने अभी जुलाई में ही ज्वाॅइन किया है। वर्तमान में स्कूल में कक्षा-कक्ष एवं शिक्षकों की कमी से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चिमनलाल यादव, कार्यवाहक संस्थाप्रधान, राउमावि बोरमाता

Updated on:
08 Aug 2026 06:00 am
Published on:
08 Aug 2026 06:00 am