
सागवाड़ा. शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम ने कहा कि मानव जीवन अज्ञान से ज्ञान की ओर, सीमितता से अनन्तता की ओर, भय से अभय की ओर तथा बन्धन से मुक्ति की ओर अग्रसर होने वाली एक दिव्य आध्यात्मिक यात्रा है। कान्हडदासधाम बड़ा रामद्वारा में बुधवार को प्रवचन में बताया कि जीवन में घटित होने वाली प्रत्येक घटना, चाहे सुखद हो या दु:खद, अनुकूल हो या प्रतिकूल, वह केवल बाह्य परिस्थिति नहीं है, अपितु आत्मजागरण का एक पवित्र अवसर है। संत ने कहा कि मानव जीवन का परम लक्ष्य केवल सांसारिक सफलता या दु:खों से बचना नहीं है, बल्कि अपने वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार करना है। वही स्वरूप नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, अनन्त आत्मा है, जो ब्रह्मस्वरूप है।
हम सदैव आशावादी रहें, इस कारण नहीं कि परिस्थितियां एक दिन बदल जाएंगी, बल्कि इसलिए कि आपका वास्तविक स्वरूप स्वयं पूर्ण, अखंड, अविनाशी और परिवर्तनातीत है। संसार, शरीर और मन बदलते हैं, परन्तु आपके भीतर स्थित साक्षी चैतन्य कभी परिवर्तित नहीं होता। संत ने कहा कि हम सीमित जीव नहीं हैं जो अनन्त बनने का प्रयास कर रहे हैं। हम स्वयं अनन्त ब्रह्म हैं, जो सीमित व्यक्तित्व के माध्यम से प्रकट हो रहे हैं। अत: स्वयं को कभी दुर्बल या असहाय मत समझिए। हम परिस्थितियों के हाथों विवश कोई तुच्छ व्यक्ति नहीं हैं। प्रवचन में ‘सकल हंस में राम बिराजे’ भक्ति गीत प्रस्तुत किया। प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि संत प्रसाद पंकज सोमपुरा परिवार की ओर से रहा।