www.patrika.com/rajasthan-news
बांसवाड़ा शहर के पूर्वी छोर पर अरावली की पहाडिय़ों में मंदारेश्वर शिवालय अगाध आस्था का केंद्र है। पहाड़ों की कंदरा में अवस्थित यह शहर का एकमात्र शिवालय है। दत्त मंदारेश्वर सेवा संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रेमकांत जोशी बताते हैं कि यह शिवालय वर्षों पुराना है। पहले यहां आने के लिए कच्चा मार्ग ही था। मंदिर के चारों ओर जंगल था। बिजली नहीं थी। समय के साथ अब यहां आवागमन सहित सभी सुविधाएं बढ़ी हैं। यहां शिवशंकर की आरती गायन का अंदाज भी अनूठा है। मंदिर के अंदर शिवलिंग के पास ही मुस्लिम समाजजनों की एक दरगाह भी स्थित है। इसलिए इस मंदिर में सभी धर्म के लोग दर्शन के लिए आते है।
शिवरात्रि पर भरता मेला
मंदारेश्वर शिव मंदिर में प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर मेला भरता है, जिसमें हजारों शिवभक्त उमड़ते हैं। श्रावण माह में बेणेश्वर से मंदारेश्वर तक कावड़ यात्रा में शिवभक्ति का ज्वार उमड़ता है। ट्रस्ट की ओर से यहां श्रद्धालुओं की सुविधार्थ और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विकास कार्य कराए गए हैं।
शिवालयों में आशुतोष का अभिषेक
बांसवाड़ा. एक माह तक भोले भण्डारी भगवान आशुतोष की आराधना के रूप में मनाए जाने वाले श्रावण मास के तहत शिवालयों में भगवान शिव के जयकारें गूंजने लगे हैं एवं सुबह-शाम विशेष आरती के साथ भजन कीर्तन का दौर भी शुरू हो गया है। भक्तों की ओर से भगवान भोले का आकर्षक श्रृंगार किया जा रहा है एवं मंदिरों को भी रंगीन लाइटों से सजाया गया है।
एक माह तक भोले के भक्त शिव मंत्रों के साथ बिल्व पत्र चढ़ा कर तप अर्चना करेंगे। वहीं श्रावण मास के पहले सोमवार को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। शिवालयों में रविवार को देर रात तक सफ ाई व सजावट की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। शहर के वनेश्वर महादेव, त्र्यम्बकेश्वर, मंदारेश्वर सहित अन्य मंदिरों में शिव भक्त व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं जलाभिषेक एवं पूजन के लिए बेल पत्र, धतूरा फ ल फू ल की मांग बढ़ गई है।