बांसवाड़ा

आत्मचिंतन व संयम ही सामायिक का मूल भाव: भक्तिचंद्र विजय

Rajasthan

- नेमीनाथ मंदिर में गौतम कमल तप, समूह सामायिक में जुटे श्रद्धालुडूंगरपुर @ पत्रिका. मनुष्य में आत्मचिंतन, धर्म की आराधना और संयम का भाव जागृत होना ही सामायिक का मूल अर्थ है। यह बात संभवनाथ उपाश्रय में चातुर्मास विराजित पन्यास भक्तिचंद्र विजय ने समूह सामायिक की आराधना के दौरान श्रावकों से कहा। उन्होंने बताया कि 45 मिनट की यह आराधना अंतर्मन के भाव से करनी होगी, तभी आत्मचिंतन के साथ कषायों से भी दूर हो सकेंगे। भक्तिचंद्र विजय ने कहा कि तप आत्मा को निखारने का मूल मंत्र है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि हम चातुर्मास के दौरान संयमित जीवन जीने के साथ-साथ तप को भी जीवन में अंगीकार करें। इस दौरान संगीतकार त्रुपेश भाई ने संगीतमय विरति धर्म की संवेदना पर विशेष अध्यात्मिक भाव के साथ श्रावक-श्राविकाओं के समक्ष प्रस्तुति दी और समूह सामायिक की महत्ता का विवेचन किया। लाभार्थी परिवार सरैया नर्वदा बेन गोवर्धनलाल परिवार द्वारा समूह सामायिक में 200 श्रावक-श्राविकाओं की अनुमोदना की गई। इसी तरह, नेमीनाथ मंदिर के पुण्य प्रवचन हॉल में साध्वी निर्मलगुणा के सानिध्य में गौतम कमल तप की आराधना के साथ समूह सामायिक का आयोजन भी रविवार को किया गया। इसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों ने शिरकत की।

Updated on:
10 Aug 2026 06:01 am
Published on:
10 Aug 2026 06:01 am